छठ के दौरान इन गलतियों से नाराज हो सकती हैं छठी मैया, बरतें विशेष सावधानी।

Blessings Of Chhathi Maiya: छठ पूजा के दौरान इन गलतियों से बचें, वरना छठी मैया नाराज हो सकती हैं। व्रत में विशेष सावधानी बरतकर पुण्य और सुख-समृद्धि प्राप्त करें।
Chhath Vrat Rules
छठ व्रत (सौ. Gemini)
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Chhath Vrat Rules: सूर्य उपासना का महापर्व छठ हिंदू धर्म के सबसे कठिन और पवित्र व्रतों में से एक है। छठी माता और सूर्य देव को समर्पित चैती छठ का यह महापर्व इस वर्ष 22 मार्च से शुरू होकर 25 मार्च तक मनाया जाएगा। यह पर्व खासतौर पर बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में श्रद्धा और भक्ति के साथ बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

संतान प्राप्ति के लिए छठ व्रत बड़ा फलदायक

धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन जो भी भक्त सच्चे मन से इस व्रत को करता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है। खासतौर पर संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत बड़ा फलदायक बताया गया है। हालांकि, पूजा का फल तभी प्राप्त होता है जब व्रत सभी नियमों का पालन करते हुए विधि-विधान से किया जाए। ऐसे में आइए जानते हैं कि संध्या अर्घ्य के दिन क्या करें और क्या न करें?

संध्या अर्घ्य के दिन क्या करें और क्या न करें?

  • वर्जित बर्तन: अर्घ्य देते समय या प्रसाद के लिए स्टील, शीशा, प्लास्टिक या कांच के बर्तनों का उपयोग न करें। बल्कि केवल पीतल, तांबा या बांस के सूप,टोकरी का उपयोग करें।
  • अशुद्धता से बचें: बिना स्नान किए या गंदे हाथों से प्रसाद और पूजा सामग्री को न छुएं।
  • गुस्सा न करें: इस दिन क्रोध, झूठ बोलने, या किसी को भला-बुरा कहने से बचें।
  • निर्जला व्रत: खरना के बाद से शुरू होने वाला 36 घंटे का निर्जला व्रत अत्यंत कठिन है, इसे बीच में न तोड़ें।
  • समय का ध्यान: संध्या अर्घ्य डूबते सूर्य को दिया जाता है, लेकिन सही समय पर अर्घ्य न देना दोषपूर्ण माना जाता है।
  • सात्विक वातावरण: घर में लहसुन-प्याज का सेवन बिल्कुल न करें और पूरा घर सात्विक रखें।

छठ व्रत के अन्य जरूरी नियम

  • 36 घंटे का निर्जला व्रत: खरना के प्रसाद के बाद से लेकर चौथे दिन के उषा अर्घ्य तक व्रती को अन्न और जल का त्याग करना होता है।
  • साफ-सफाई: पूजा के समय घर और घाट की सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पूजा सामग्री को कभी भी गंदे हाथों से नहीं छूना चाहिए।
  • सूर्य देव का ध्यान: अर्घ्य देते समय मन में सूर्य देव और छठी मैया का ध्यान करें और जल की धारा के माध्यम से ढलते हुए सूर्य को देखें।
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