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चैत्र नवरात्रि की पूजा में ज़रूर पढ़ें यह पौराणिक व्रत कथा

Navratri Vrat Katha In Hindi : चैत्र नवरात्रि के दौरान इस पौराणिक व्रत कथा को पढ़ना आवश्यक माना जाता है, जो देवी पूजा और आस्था से जुड़ी महत्वपूर्ण शिक्षाएं देती है।

  • Written By: सीमा कुमारी
Updated On: Mar 19, 2026 | 06:12 PM

मां अंबे (सौ.सोशल मीडिया)

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Chaitra Navratri Vrat Katha: आज 19 मार्च से चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो गई है। चैत्र नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक माना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी चैत्र नवरात्र का महापर्व पूरे देशभर में अपार श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है।

हिन्दू मान्यता के अनुसार, नवरात्रि का पावन पर्व वैसे तो 9 दिन मनाया जाता है लेकिन इस साल चैत्र नवरात्रि 8 दिन की बताई जा रही हैं। बताया रहा है कि, इस बार नवरात्रि की अष्टमी और नवमी एक ही दिन मनाई जा रही है।

जिस कारण से एक नवरात्र कम हो गया है। पंचांग अनुसार 2026 में चैत्र नवरात्र 19 मार्च से 26 मार्च तक रहेंगे। बता दें नवरात्रि में श्रद्धालु उपवास रखते हैं और मां अंबे की सच्चे मन से आराधना करते हैं।

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दौरान व्रत रखने वालों के लिए नवरात्रि कथा पढ़ना भी जरूरी माना गया है। चलिए आपको बताते हैं नवरात्रि के नौ दिन माता रानी की कौन सी कथा पढ़नी या सुननी चाहिए।

क्या है चैत्र नवरात्रि व्रत कथा

नवरात्रि के नौ दिन माता रानी की कथा में बताया गया है कि यह व्रत क्यों और कैसे किया जाता है और इसके करने वाले को क्या फल मिलते हैं। ब्रह्माजी ने बृहस्पति जी को बताया कि जो मनुष्य माता दुर्गा, महादेव, सूर्य और नारायण का ध्यान कर व्रत करता है, वह धन्य है। यह व्रत संपूर्ण कामनाओं को पूरा करता है—पुत्र, धन, विद्या, सुख और रोगों से मुक्ति। व्रत करने से घर में समृद्धि बढ़ती है और पापों से छुटकारा मिलता है।

कथा में प्राचीन काल के पीठत नगर के ब्राह्मण और उसकी कन्या सुमति का वर्णन है। सुमति माता दुर्गा की भक्त थी। एक दिन खेल में व्यस्त होने के कारण उसने पूजा नहीं की, जिससे उसके पिता क्रोधित हुए और उसे एक कुष्टी रोगी के साथ विवाह कर दिया। दुःख में सुमति अपने पति के साथ वन में चली गई।

उसकी भक्ति और पूर्व जन्म के पुण्य के प्रभाव से देवी दुर्गा प्रकट हुईं और उसे वरदान दिया। सुमति ने देवी से नवरात्र व्रत की विधि और फल जानने की इच्छा व्यक्त की।

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देवी ने बताया कि व्रत आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नौ दिन तक विधिपूर्वक करें। प्रतिदिन महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की मूर्तियों की पूजा करें, पुष्प और फल अर्पित करें। अंतिम दिन हवन करें और आचार्य को दक्षिणा दें।

इस व्रत से सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं, दान और पूजा का फल करोड़ों गुना मिलता है और अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। जो भक्तिपूर्वक यह व्रत करता है, वह सांसारिक सुख और अंततः मोक्ष की प्राप्ति करता है।

Chaitra navratri puja must read this pauranik vrat katha

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Published On: Mar 19, 2026 | 04:36 PM

Topics:  

  • Chaitra Navratri
  • Goddess Durga
  • Navratri
  • Religion News

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