प्रसूताओं की मौत के बाद हरकत में आया राजस्थान प्रशासन, प्रतिबंधित की गईं 24 दवाएं, इन कर्मचारियों पर गिरी गाज

Rajasthan Drug Ban: कोटा मेडिकल कॉलेज में दो महिलाओं की मौत मामले में कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई। साथ ही 24 दवाओं के सप्लाई और इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया।
Rajasthan Administration Springs into Action Following Deaths of New Mothers; 24 Medicines Banned, Employees Face the Axe
कोटा मेडिकल कॉलेज केस (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Kota Medical College Death Case: कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन डिलीवरी के बाद हुई दो महिलाओं की मौत मामले में राजस्थान सरकार के औषधि नियंत्रण विभाग ने बड़ा एक्शन लिया है। शुक्रवार को औषधि नियंत्रण विभाग ने एक पत्र लिखकर राज्य में 24 दवाओं के सप्लाई और इस्तेमाल पर तुरंत प्रभाव से पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा। विभाग की ओर से जारी निर्देश में सभी निर्माताओं, स्टॉकिस्टों, थोक विक्रेताओं और एजेंटों को दवाओं के कानूनी जांच रिपोर्ट के आने तक इन दवाओं के सप्लाई या बेचनें पर रोक लगाया गया है। विभाग द्वारा प्रतिबंधित वस्तुओं में इंजेक्शन, ग्लूकोज की बोतलें, आईवी सेट, सिरिंज, कैथेटर आदि जो सर्जरी और प्रसवोत्तर उपचार के दौरान प्रयोग किया जाता है, चिकित्सा सामग्रियां शामिल है।

रिपोर्ट आने तक लगी रोक

ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने राजस्थान चिकित्सा सेवा निगम लिमिटेड और राज्य भर के दवा विक्रेताओं को निर्देश जारी कर उन दवाओं और उपकरणों का उपयोग या वितरण न करने का निर्देश दिया है जिनके नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया कि परीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने तक इन दवाओं और उपकरणों का उपयोग किसी भी सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में नहीं किया जाएगा।

24 दवाओं के लिए सैंपल

अधिकारियों के अनुसार, जांच के दायरे में आए 24 दवाओं और चिकित्सा उपकरणों में से 15 को आरएमएससीएल द्वारा कोटा मेडिकल कॉलेज को आपूर्ति की गई थीं, जबकि शेष नौ को अस्पताल प्रशासन द्वारा स्थानीय स्तर पर प्राप्त किया गया था। सभी दवाओं और उपकरणों के नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे गए हैं, और जांच पूरी होने तक इनकी आपूर्ति और उपयोग निलंबित रहेगा।

क्या है मामला?

राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज में दो प्रसूताओं की सीजेरियन ऑपरेशन के बाद हुई मौत और कई अन्य मरीजों के गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मामले सामने आने के बाद प्रशासन ने इसे संज्ञान में लिया। मामला बढ़ने के बाद चिकित्सा विभाग ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए। शुरुआती जांच में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही पाई गई। इसके बाद कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई।

विभाग द्वारा कार्रवाई में डॉ. श्रद्धा उपाध्याय को सेवा से हटा दिया गया है। साथ ही दो नर्सिंग स्टाफ सदस्यों और सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. नवनीत कुमार को भी निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, वार्ड प्रभारी और अन्य चिकित्सा कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गया है।

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