राजस्थान में BJP की हैट्रिक, जयपुर-जोधपुर-कोटा में मेयर पद पर कब्जा, कांग्रेस के 4 पार्षदों ने की बगावत

Rajasthan Election: राजस्थान नगर निगम चुनाव में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल कर जयपुर, जोधपुर और कोटा पर कब्जा जमा लिया है। इस जीत को बीजेपी आगामी विधानसभा चुनाव के लिहाज से बड़ी जीत देख रही है।
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भाजपा का झंडासोर्स (सोशल मीडिया)
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Rajasthan Mayor Election: विपक्ष के लाख आरोपों के बाद भी देश में मोदी मैजिक का कमाल देखने को मिल रहा है। चुनाव छोटा हो या फिर बड़ा वोटरो का भरोसा मोदी पर टिका हुआ है। इसी बीच राजस्थान के नगर निगम चुनावों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए तीन प्रमुख शहरों में अपना परचम लहरा दिया है।

राजस्थान के प्रमुख शहर जयपुर, जोधपुर और कोटा में हुए मेयर चुनाव के नतीजे भाजपा के पक्ष में आए हैं। इन तीनों बड़े शहरों में BJP प्रत्याशियों ने भारी मतों से विजय हासिल कर कांग्रेस को करारी शिकस्त दी है। इस प्रचंड जीत के बाद पूरे प्रदेश में BJP कार्यकर्ताओं में जश्न का माहौल है, जबकि कांग्रेस के खेमे में निराशा नजर आई।

जयपुर में दिखा सुनील का जलवा

राजधानी जयपुर में मेयर पद के लिए हुए चुनाव में भाजपा के सुनील कोठारी ने एकतरफा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। सुनील कोठारी को कुल 89 वोट मिले, जो उनकी मजबूत लोकप्रियता और पार्टी की एकजुटता को दर्शाता है। इतनी बड़ी संख्या में मिले वोटों ने साबित कर दिया है कि जयपुर में भाजपा का पलड़ा कितना भारी था।

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जोधपुर से प्रसन्न ने मारी बाजी

मारवाड़ के प्रमुख शहर जोधपुर में भी भाजपा ने शानदार जीत हासिल की है। यहां मेयर पद के कड़े मुकाबले में BJP के प्रत्याशी प्रसन्न मेहता ने जीत का परचम लहराया। चुनाव में प्रसन्न मेहता को 53 वोट हासिल हुए, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 47 वोटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस करीबी लेकिन महत्वपूर्ण जीत ने जोधपुर में भाजपा के दबदबे को और मजबूत कर दिया है।

शिक्षा नगरी से अनुसुईया पड़ी भारी

देश की शिक्षा नगरी कोटा के नतीजे सबसे ज्यादा चौंकाने वाले और कांग्रेस के लिए चिंताजनक रहे। 100 वार्डों वाले कोटा नगर निगम में भाजपा की अनुसुईया गौस्वामी ने 65 वोट हासिल कर मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाया। वहीं कांग्रेस की प्रत्याशी सुनीता सुमन को 35 वोट से संतोष करना पड़ा। यह जीत इसलिए भी बड़ी है क्योंकि कोटा में कांग्रेस को अपनी ही पार्टी के भीतर से बगावत का सामना करना पड़ा है।

कांग्रेस के भीतर कलह

कोटा के चुनावी नतीजों ने कांग्रेस की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम बात यह रही कि कांग्रेस के 4 सभासदों ने अपनी पार्टी से बगावत करते हुए भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की। इस क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और असंतोष को उजागर कर दिया है। तीनों बड़े शहरों में हार और पार्षदों के टूटने से कांग्रेस नेतृत्व को गहरे आत्ममंथन की जरूरत महसूस हो रही है। वहीं, बीजेपी इस ट्रिपल जीत को आगामी राजनीतिक लड़ाइयों के लिए एक बड़े बूस्टर के रूप में देख रही है।

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