जब सरकार सुनने को तैयार न हो, तब...कोटा महारैली से पहले राहुल की Gen-Z से बड़ी अपील, बोले- सपने तोड़ रही सरकार

Paper Leak Student Rally: कोटा में छात्र सम्मेलन से पहले राहुल गांधी ने Gen-Z को बड़ा संदेश दिया है। पेपर लीक और घोटालों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए छात्रों को रैली पहुंचने की अपील की है।
When the government is unwilling to listen... Rahul's major appeal to Gen-Z ahead of the Kota mega-rally; says the government is shattering dreams.
राहुल गांधी (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Rahul Gandhi Gen Z call Kota: पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा में होने वाले छात्र सम्मेलन से पहले जेन-Z आह्वान किया है। युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मेरे युवा और Gen Z साथियों एक बात मेरे मन में साफ है और आप भी इसे दिल में बैठा लीजिए। भारत के हर युवा का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है।

'युवा देश का भविष्य'

17 जून को होने वाली महारैली के लिए राहुल गांधी ने अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट लिखा। पोस्ट में उन्होंने लिखा कि पेपर लीक, परीक्षा कुप्रबंधन, रद्द होती भर्तियां, आसमान छूती फीस, निजीकरण, घोटाले, इन्हीं औजारों से वो हर दिन करोड़ों सपने तोड़ रही है। याद रखिए, युवा का भविष्य ही देश का भविष्य तय करेगा। आगे उन्होंने लिखा कि यही सब आपसे विस्तार से कहना है। इसलिए मैं आपको बुला रहा हूं। देश की हर गली, हर कस्बे, हर शहर से उठती छात्रों की गूंज को आइए कोटा में हुंकार बनाएं।

आप थक चुके हैं, गुस्से में हैं: राहुल

देश के हर युवा से मेरी एक बात आज इस देश में मेहनत का फल नहीं, सपने देखने की सजा मिलती है। हर पेपर लीक, हर रद्द परीक्षा, हर अधूरी भर्ती सिर्फ सिस्टम की विफलता नहीं, लाखों सपनों पर प्रहार है। मैं जानता हूं आप थक चुके हैं, गुस्से में हैं पर याद रखिए जब सरकार सुनने को तैयार न हो, तब आवाज ऊंची करनी पड़ती है। इसलिए मैं आप सबको बुला रहा हूं।

'छात्रों के हिस्से में आती है- भीड़, घुटन, और बेबसी'

इसके पहले ट्रेन का एक वीडियो भी राहुल गांधी ने पोस्ट किया। वीडियो में एक युवक की दम घुटने से मौत हो गई। पोस्ट में राहुल ने लिखा, इस वीडियो ने मुझे झकझोर दिया। ये उस भारत के लाचार युवा हैं, जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफर तक नहीं दे सकती। चुनाव के वक्त यही सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतजाम कर लेती है और परीक्षा देने जा रहे छात्रों के हिस्से में आती है- भीड़, घुटन, और बेबसी।

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