पंजाब की शर्त नहीं माना केंद्र, SYL विवाद में हरियाणा ने किया सुप्रीम कोर्ट रुख

SYL News: हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों के बीच केंद्रीय जलशक्ति मंत्री की मध्यस्थता में SYL विवाद पर बैठक बेनतीजा रही। हरियाणा सरकार अब सुप्रीम कोर्ट जाएगी।
पंजाब की शर्त नहीं माना केंद्र, SYL विवाद में हरियाणा ने किया सुप्रीम कोर्ट रुख
भगवंत मान, नायब सैनी (फोटो-सोशल मीडिया)
Updated on

SYL Dispute: हरियाणा और पंजाब के बीच चल रहा सतलुज युमना लिंक नहर (SYL) का विवाद सुलझ नहीं आ रहा है। 9 जुलाई के बाद आज यानी 5 अगस्त मंगलवार को एक बार फिर बैठक हुई। लेकिन बात नहीं बन पाई। इस बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल मौजूद रहे। घंटों तीनों नेताओं ने जल विवाद को लेकर मंथन किया, लेकिन हल नहीं निकल पाया।

पंजाब सीएम ने फिर रावी नदी के पानी को लेकर अपना पक्ष रखा, लेकिन केंद्रीय जलशक्ति मंत्री पंजाब की डिमांड पर असहमति व्यक्त की। इसके बाद बैठक खत्म हो गई। वहीं अब इस जल विवाद को लेकर हरियाणा सरकार पंजाब एंव हरियाणा हाईकोर्ट जाएगी।

खास बात ये हैं कि इस बैठक से पहले पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने स्पष्ट कर दिया था कि बात नहीं बनेगी और हुआ भी ऐसा ही। उन्होंने कहा कि हरियाणा हमारा भाई है, हमें अगर आगे से पानी मिलता है तो हमें पानी हरियाणा को देने में कोई परेशानी नहीं है। वहीं बैठक से पहले हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों की कमेस्ट्री देखने को मिली। दोनों नेताओं ने एक दूसरे का गले लगाकर स्वागत किया।

पंजाब कि क्या है डिमांड

सीएम मान ने कहा कि इस बैठक से एक उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल समझौता रदद् हो गया है। अब पाकिस्तान को जाने वाला पानी पंजाब लाया जाए। उन्होंने कहा कि झेलम का पानी पंजाब नहीं आ सकता है, इसलिए चिनाब और रावी का पानी पंजाब को पौंग, रंजीत सागर डैम और भाखड़ा डैम की मदद से दिया जाए।

SYL 212 किलोमीटर लंबी है

सतलुज यमुना लिंक नहर (SYL) को लेकर इससे पहले की कई बैठकें बेनतीजा रही हैं। हरियाणा में इस लिंक परियोजना का काम पूरा हो चुका है। वहीं पंजाब में सरकार ने नहर की खुदाई पर रोक लगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2002 में हरियाणा के पक्ष में फैसला सुनाया था। पंजाब सरकार को नहर के निर्माण का आदेश दिया था। इसके 2 साल बाद पंजाब की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में कानून बनाकर 1981 के समझौते को ही रद्द कर दिया। इसके बाद से नहर निर्माण का काम फंस गया है। अब इस मामले में फिर से सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। अगली सुनवाई 13 अगस्त को है।

Navbharat Live
navbharatlive.com