

Punjab Congress Political Crisis: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, लेकिन इससे पहले की कांग्रेस में दो फाड़ होते नजर आ रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकत की है। इस मुलाकत के बाद पंजाब के सियासी हलकों में नई हलचल मचा दी है। माना जा रहा कि राहुल गांधी के विदेश यात्रा से वापस लौटते ही पंजाब कांग्रेस में बड़ी सियासी लड़ाई की शुरुआत हो सकती है।
पंजाब कांग्रेस में हाल के दिनों में आपसी तकरार की खबरें सामने आई हैं। जानकारी के मुताबिक, इस सब की शुरुआत हाल ही में हुए संगठनात्मक बदलावों के बाद हुई। अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष (पीपीसीसी चीफ) के पद पर बरकरार रखे जाने के फैसले से पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी नाराज हैं। उन्होंने हाल ही में इसके विरोध में अपने आवास पर एक बैठक बुलाई थी।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया संगठनात्मक बदलावों से नाराज कई नेताओं ने चन्नी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। इसके अलावा उन्होंने चन्नी को अलगे 15 दिन के अंदर पार्टी हाईकमान के समाने अपनी शर्तें रखने के लिए कहा है। साथ ही उन्होंने राहुल गांधी के अगले हफ्ते विदेश यात्रा से लौटने के बाद उनसे मिलने की कोशिश करने की बात कही है।
चन्नी के घर पर करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में 60 से अधिक नेता शामिल हुए थे। इस बैठक को चन्नी के शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें उन्होंने इतनी बड़ी संख्या में नेताओं को साथ लाकर हाईकमान को अपने फैसले पर एक बार फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है। चन्नी ने यह बगावत विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की है। जानकारी के मुताबिक, इस बैठक में हाल ही में गठित की गई चुनाव समिति के कई अहम सदस्य और 20 से ज्यादा पूर्व और मौजूदा विधायक शामिल हुए थे।
मीटिंग में शामिल प्रमुख नेताओं की बात करें तो इसमें पूर्व मंत्री तृप्त राजिंदर बाजवा, सुखबिंदर सरकारिया, ओ.पी. सोनी, भरत भूषण आशु और परमिंदर पाल पिंकी मौजूद थे। इसके अलावा पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह भी मीटिंग में शामिल हुए थे।
चन्नी के शक्ति प्रदर्शन के जवाब में राजा वड़िंग गुट ने इसे फ्लॉप शो करार दिया और कहा कि हाईकमान सभी घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रही है। दोनों गुटों के बीच मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि पूर्व डिप्टी सीएम सुखजिंदर सिंह रंधावा अमित शाह से मिलने उनके अवास पहुंच गए। रंधावा ने इस मुलाकात राजनीतिक एंगल को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि दो महीने पहले उन्होंने प्रधानमंत्री को राज्य की सीमावर्ती इलाकों में बिगड़ती कानून व्यवस्था पर एक पत्र लिखा था। वो गृह मंत्री को उसी की एक प्रति सौंपने गए थे।