बजट पेश होने के बाद पंजाब पहुंचेंगे PM मोदी, दलित वोट बैंक को साधने में जुटी BJP, क्यों खास है रविदासिया समाज?
Ravidas Jayanti: संसद में बजट पेश होने के बाद पीएम मोदी जालंधर के डेरा सचखंड के दौरे पर जा रहे हैं। यहां पर वह डेरा प्रमुख पद्म सम्मान विजेता निरंजन दास से भी मुलाकात करेंगे।
- Written By: अर्पित शुक्ला
PM मोदी (Image- Social Media)
PM Modi Punjab Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल यानी 1 फरवरी को बजट पेश होने के बाद शाम को पंजाब दौरे पर जा रहे हैं। पीएम का यह दौरा गुरु रविदास की 649वीं जयंती के अवसर पर जालंधर के बल्लां स्थित डेरा सचखंड में आयोजित कार्यक्रम के लिए है, जो रविदासिया समाज का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। विधानसभा चुनाव में अब एक साल से भी कम समय बचा है, ऐसे में राज्य की जाति आधारित राजनीति में रविदासिया समाज की अहम भूमिका को देखते हुए प्रधानमंत्री का यह दौरा काफी मायने रखता है।
पीएम मोदी के इस दौरे से पहले जालंधर में दहशत फैलाने की भी कोशिश की गई थी। कुछ स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकियां मिली थीं, हालांकि बाद में ये सभी कॉल फर्जी निकलीं। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भाजपा और उसकी पूर्व क्षेत्रीय सहयोगी पार्टियां राज्य में दलित समुदाय को अपने पक्ष में लाने की रणनीति पर काम कर रही हैं।
आखिर क्यों अहम है रविदासिया समाज?
पंजाब में आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए सभी प्रमुख पार्टियां दलित वोट बैंक को साधने में जुटी हैं। दोआबा क्षेत्र में दलित आबादी करीब 45 फीसदी है, जो राज्य के औसत 32 फीसदी से काफी ज्यादा है। इसी क्षेत्र में पंजाब की 23 विधानसभा सीटें आती हैं। माना जाता है कि बल्लां स्थित डेरा इन 23 में से करीब 19 सीटों पर प्रभाव रखता है, जिससे इसकी राजनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
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संसद में बजट पेश होने के बाद पीएम मोदी का पंजाब दौरा काफी व्यस्त रहने वाला है। जालंधर पहुंचने पर प्रधानमंत्री आदमपुर एयरपोर्ट का नया नामकरण करेंगे। इसके बाद यह एयरपोर्ट ‘श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट, आदमपुर’ के नाम से जाना जाएगा। इस मांग को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई जा रही थी।
केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा रविदासिया समुदाय को साधने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। हाल ही में 26 जनवरी को घोषित पद्म पुरस्कारों में डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख निरंजन दास का नाम भी शामिल किया गया था।
दलित वोटरों पर भाजपा की नजर
भाजपा लंबे समय तक पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की जूनियर सहयोगी के तौर पर रही है। किसान आंदोलन के बाद राज्य में पार्टी की स्थिति और कमजोर हुई, वहीं अकाली दल से गठबंधन भी टूट गया। ऐसे में अब भाजपा का मुख्य फोकस दलित वोटरों पर है, जिसे पार्टी पंजाब की राजनीति में खुद को मजबूत करने की कुंजी मान रही है।
इस रणनीति का असर कुछ हद तक आंकड़ों में भी दिखता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर महज 6.6 फीसदी था, जो लोकसभा चुनाव में बढ़कर 18.56 फीसदी तक पहुंच गया। हालांकि इसमें किसान आंदोलन के प्रभाव के कम होने जैसे अन्य कारण भी शामिल माने जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रविदासिया समुदाय को साधकर भाजपा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
हालांकि, पंजाब की राजनीति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि दलित वोटर एकजुट होकर किसी एक पार्टी को वोट नहीं करते। चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. कंवलप्रीत कौर ने द प्रिंट से बातचीत में कहा, “रविदासिया और अन्य दलित समुदाय किसी एक पार्टी के पक्ष में एकमुश्त मतदान नहीं करते। उनका रुख स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और गठबंधनों पर निर्भर करता है।” उनके मुताबिक, यह समुदाय लंबे समय से अलग पहचान की मांग करता रहा है और भाजपा इसे राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की कोशिश कर रही है।
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भाजपा का क्या कहना है?
भाजपा नेतृत्व ने प्रधानमंत्री के इस दौरे को राजनीतिक नजरिए से न देखने की अपील की है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, “यह पंजाब के लिए गर्व का अवसर है। प्रधानमंत्री का रविदास जयंती समारोह में शामिल होना सभी समुदायों के बीच एकता का संदेश देता है।”
वहीं, पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि बजट वाले दिन प्रधानमंत्री का यह दौरा “आस्था और सम्मान को प्राथमिकता देने” का प्रतीक है। जाखड़ ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक इस समुदाय की अनदेखी की।
