कांग्रेस खुद की ही दुश्मन, अब पंजाब में कर दी बहुत बड़ी गलती...खो देगी अपना वोट बैंक!

Congress News : पंजाब में कांग्रेस अपने ही नेताओं के बयानों के कारण मुश्किल में फंस रही। प्रताप सिंह बाजवा ने मंत्री को बैंड बाजे वाला कहा तो AAP ने उन्हें दलित विरोधी बताकर विरोध शुरू कर दिया है।
Congress is its own enemy, now it has made a big mistake in Punjab...it will lose its vote bank!
कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते राहुल गांधी। इमेज-सोशल मीडिया, फाइल फोटो
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Punjab Politics : पंजाब की राजनीति में कांग्रेस इस समय एक अजीबोगरीब स्थिति से गुजर रही है। 2024 के लोकसभा चुनावों में 13 में से 7 सीटें जीतकर राज्य में सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी कांग्रेस, 2027 की चुनावी दहलीज पर पहुंचने से पहले ही अपनों के 'जुबानी तीर' से घायल हो रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पार्टी सरकार को घेरने के बजाय अपने ही वरिष्ठ नेताओं की बयानबाजी के बोझ तले दबती जा रही है।

ताजा विवाद नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के एक बयान से शुरू हुआ। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आम आदमी पार्टी (AAP) को घेरते हुए बाजवा ने कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ पर निजी टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि हरभजन सिंह पहले बैंड बजाते थे और अब हम उनकी बैंड बजा देंगे। इस बयान को आप ने हाथों-हाथ लिया और इसे दलित समाज का अपमान करार दिया। सोमवार को चंडीगढ़ की सड़कों पर भारी हंगामा देखने को मिला, जब आप कार्यकर्ताओं ने बैंड-बाजों के साथ बाजवा के आवास का घेराव किया। पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। आप नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस की मानसिकता जातिवादी और दलित विरोधी है।

चन्नी और भट्टल के बयानों ने भी बढ़ाई मुश्किल

यह पहली बार नहीं है, जब पंजाब कांग्रेस अपने नेताओं के बयानों से बैकफुट पर आई हो। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने पार्टी के भीतर दलितों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने की बात कहकर अपनी ही पार्टी को कटघरे में खड़ा कर दिया था। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल के एक इंटरव्यू ने तो सनसनी फैला दी। इसमें उन्होंने दावा किया कि कुछ अफसरों ने उन्हें सत्ता में वापसी के लिए बम ब्लास्ट तक की सलाह दी थी। हालांकि उन्होंने इस सलाह को ठुकरा दिया था, लेकिन विपक्ष ने इसे कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना लिया है।

दलित वोट बैंक पर टिकी सबकी नजर

पंजाब में लगभग 32 प्रतिशत दलित आबादी है, जो किसी भी दल की जीत-हार तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती है। कांग्रेस का यह पारंपरिक वोटबैंक अब सबकी रडार पर है। भाजपा जहां पीएम मोदी और हरियाणा के मुख्यमंत्री के जरिए इस वर्ग को साध रही है, वहीं 'आप' अब दलित उपमुख्यमंत्री बनाने के पुराने वादे को पूरा करने की तैयारी में है। गौरतलब है कि 2022 की हार के बाद कांग्रेस ने खुद को संभाला जरूर था, लेकिन प्रताप सिंह बाजवा और राजा वडिंग जैसे बड़े नेताओं की विवादित बयानबाजी पार्टी की छवि धूमिल कर रही है। अगर पार्टी ने अपने नेताओं के बीच समन्वय और संवाद की मर्यादा तय नहीं की, तो 2027 की राह में उसका सबसे बड़ा दुश्मन वह खुद ही साबित होगी।

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