काम नहीं आई चन्नी की चाल! कांग्रेस हाईकमान ने दिया दो टूक संदेश, वड़िंग ही रहेंगे पंजाब के अध्यक्ष
Amarinder Singh Raja Warring: पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस हाईकमान ने बड़ा फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ही प्रदेश अध्यक्ष बने रहेंगे।
- Written By: अक्षय साहू
कांग्रेस हाईकमान ने चन्नी गुट को दिया झटका (सोर्स- सोशल मीडिया)
Punjab Congress Internal Dispute: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है, लेकिन इससे पहले पंजाब कांग्रेस में दरार पड़ती नजर आ रही है। पंजाब कांग्रेस में पिछले 15 दिनों से नेतृत्व को लेकर घमासान चल रहा था, जो फिलहाल थमता नजर आ रहा है। कांग्रेस हाईकमान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और समर्थकों को साफ संकेत दे दिए हैं कि पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पर अब कोई भी बदलाव नहीं किया जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस हाईकमान ने यह फैसला नई दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में ग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ हुई बैठक के दौरान लिया। कांग्रेस हाईकमान ने साफ कर दिया है कि प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के पास ही रहेगी।
हाईकमान के फैसले पर क्या बोले चन्नी?
चरणजीत सिंह चन्नी ने बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके लिए पार्टी सबसे पहले है, वो हाईकमान के फैसले का वो सम्मान करते हैं और पार्टी का फैसला ही अंतिम फैसला है। चन्नी ने राहुल गांधी को अपना नेता बताते हुए कहा कि संगठन के निर्णय का पूरी तरह सम्मान किया जाएगा। इससे पहले चन्नी अपने समर्थकों के साथ वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने का विरोध कर रहे और उन्हें हटाए जाने को लेकर मोर्चा खोले हुए थे।
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कांग्रेस हाईकमान से पहले पंजाब के प्रभारी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी अपने चंडीगढ़ दौरे के दौरान यह स्पष्ट कर दिया था कि प्रदेश अध्यक्ष नहीं बदला जाएगा। बघेल के दौरे के आखिरी दिन भी चन्नी गुट ने राणा गुरजीत सिंह के घर पर बैठक कर वड़िंग को हटाने की मांग दोहराई थी। जानकारी के मुताबिक इस बैठक में पंजाब कांग्रेस क 70 से 80 बड़े नेता शामिल हुए थे। हालांकि, हाईकमान के स्पष्ट संकेत के बाद चन्नी गुट के लिए राजनीतिक विकल्प काफी सीमित हो गए हैं।
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चन्नी से नहीं मिले राहुल गांधी
जानकारी के मुताबिक, पूरे घटनाक्रम के दौरान राहुल गांधी चन्नी से दूरी बनाते नजर आए और उन्होंने ऐसे किसी भी नेता से मुलाकात नहीं की जिसका संबंध चन्नी गुट से हो। माना जा रहा है कि ऐसा करके हाईकमान ने एक सख्त संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी आपसी खींचतान में फंसकर अपना पूरी ध्यान अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर लगाएगी और मजबूती से जनता के बीच जाएगी।
