विश्व खाद्य दिवस: उतना ही लें थाली में, जो व्यर्थ न जाए नाली में! दुनिया में आज भी 64.5 करोड़ लोग भूखे

World Food Day 2026: विश्व खाद्य दिवस पर जानिए दुनिया में भूख, खाद्य सुरक्षा, पौष्टिक आहार और भोजन की बर्बादी से जुड़ी 10 जरूरी बातें, ताजा संयुक्त राष्ट्र रिपोर्ट के आँकड़ों के साथ।
World Food Day 2026
विश्व खाद्य दिवसSource: Pinterest
Updated on: 
Food security
इस साल विश्व खाद्य दिवस की थीम "Innovate today. Nourish tomorrow." यानी "आज नवाचार करें, कल को पोषण दें" है। भूख, पौष्टिक आहार, खाद्य सुरक्षा और भोजन की बर्बादी से जुड़ी वे 10 बातें जानिए, जो हर नागरिक को पता होनी चाहिए।फोटो सोर्स- AI
Farmers working in the field
संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) 16 अक्टूबर 1945 को बना था। इसी की याद में FAO के सदस्य देशों ने 1979 में इस दिवस की घोषणा की और 1981 से यह हर साल मनाया जाता है। आज 150 से अधिक देशों में इसकी गतिविधियाँ होती हैं, जिनका मकसद भूख मिटाने की दिशा में जागरूकता और ठोस कदम बढ़ाना है।फोटो सोर्स- AI
People receiving food at a relief camp
SOFI 2026 के अनुसार 2025 में दुनिया में लगभग 64.5 करोड़ लोग यानी 7.8 प्रतिशत आबादी भूख का सामना कर रही थी। यह 2024 से करीब 1.4 करोड़ कम और 2022 के सबसे ऊँचे स्तर से 4.3 करोड़ कम है। लगातार तीन साल की यह गिरावट उम्मीद देती है, पर संख्या अब भी बहुत बड़ी है।फोटो सोर्स- AI
People farming in an African village
पहली बार अफ्रीका में भूखे लोगों की संख्या एशिया से ज़्यादा हो गई है। अफ्रीका में करीब 30.9 करोड़ लोग भूख झेल रहे हैं, जिसकी एक वजह तेजी से बढ़ती आबादी भी बताई गई है। 2025 में एशिया में यह संख्या लगभग 29.2 करोड़ रही। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में भूख का बोझ अफ्रीका पर और बढ़ सकता है।फोटो सोर्स-सोशल मीडिया
A person asking about vegetable prices in the market
भूख का मतलब सिर्फ खाली पेट रहना नहीं है। 2025 में करीब 2.1 अरब लोगों ने मध्यम या गंभीर खाद्य असुरक्षा झेली, यानी उन्हें यह पक्का भरोसा नहीं था कि अगला पौष्टिक भोजन कहाँ से आएगा। ऐसे परिवार कई बार कम खाते हैं, भोजन छोड़ते हैं या सस्ता और कम पोषक आहार चुनने को मजबूर होते हैं।फोटो सोर्स- AI
A plate filled with fruits, vegetables, and lentils
इस साल की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में करीब 2.7 अरब लोग स्वस्थ आहार का खर्च नहीं उठा सकते। फल, सब्जियाँ, दालें और दूध जैसी चीजें महँगी होने पर लोग सिर्फ पेट भरने वाले सस्ते आहार पर निर्भर रहते हैं। रिपोर्ट इसी "स्वस्थ आहार की ऊँची कीमत" को इस बार का मुख्य विषय बनाती है।फोटो सोर्स-सोशल मीडिया
Dried-up fields or flood-affected crops
खाद्य संकट की जड़ में अक्सर युद्ध और संघर्ष, मौसम की अनियमितता, आर्थिक अस्थिरता और खाद्य वस्तुओं की महँगाई होती है। रिपोर्ट के मुताबिक ऊर्जा और उर्वरक की ऊँची कीमतें भी खाद्य महँगाई बढ़ा सकती हैं। इसलिए केवल उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं, अनाज का सही वितरण और लोगों की क्रय-शक्ति भी उतनी ही अहम है।फोटो सोर्स- AI
Children having nutritious food at an Anganwadi center
लंबे समय तक पोषण की कमी का सबसे गंभीर असर बच्चों पर दिखता है। आज भी दुनिया में लगभग 15 करोड़ पाँच साल से छोटे बच्चे बौनेपन (स्टंटिंग) से प्रभावित हैं। आयरन, विटामिन और प्रोटीन की कमी यानी "छिपी हुई भूख" बच्चों की पढ़ाई, सेहत और भविष्य की कमाई तक पर असर डालती है।फोटो सोर्स-सोशल मीडिया
Food left on a plate or food thrown into the trash
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार 2022 में दुनिया में लगभग 105 करोड़ टन भोजन बर्बाद हुआ। यह उपलब्ध खाद्य का करीब पाँचवाँ हिस्सा है, और इसमें लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा घरों से आता है। इसके अलावा कटाई से बाजार तक पहुँचने के बीच भी बड़ी मात्रा में उपज खराब हो जाती है।फोटो सोर्स- AI
People collecting grain at a ration shop
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत देश की बड़ी आबादी को रियायती दर पर अनाज का अधिकार मिला है। जनवरी 2024 से पाँच साल के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में करीब 81 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त अनाज देने की घोषणा हुई। स्कूलों में PM पोषण योजना बच्चों को दोपहर का भोजन देती है, जिससे उनकी पढ़ाई और पोषण, दोनों को सहारा मिलता है।फोटो सोर्स- AI
Volunteers distributing food to those in need
हम उतना ही परोसें जितना खा सकें, बचा हुआ भोजन सँभालकर रखें या जरूरतमंद तक पहुँचाएँ, और मौसमी, स्थानीय अन्न को प्राथमिकता दें। किसानों का सम्मान करें और अनाज की बर्बादी रोकें। FAO प्रमुख के शब्दों में, लगातार घटती भूख साबित करती है कि भूख अपरिहार्य नहीं है। आज ही एक छोटा संकल्प लें, क्योंकि हर थाली मायने रखती है।फोटो सोर्स- AI

संबंधित खबरें

No stories found.
Navbharat Live
navbharatlive.com