गंगा आरती से रामनगर किले तक; ये जगहें नहीं देखी तो फिर क्या देखा, बनारस की खासियत और इतिहास

Best Places in Varanasi: बनारस में घूमने की 10 बेहतरीन जगहें कौन सी हैं? काशी विश्वनाथ, दशाश्वमेध घाट, सारनाथ से रामनगर किले तक जानिए हर स्थान की खासियत और रोचक इतिहास।
Famous Places to Visit in Varanasi
वाराणसी पर्यटन स्थलडिजाइन फोटो
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Ganga Aarti Varanasi
अस्सी घाट: गंगा किनारे बसे बनारस शहर को दुनिया की सबसे पुरानी जीवित बस्तियों में गिना जाता है। मंदिर, घाट, संगीत और स्वाद की इस नगरी में घूमने लायक 10 ख़ास जगहें जानिए, उनके इतिहास के साथ।source: Pinterest
Kashi Vishwanath Temple
काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में गिना जाता है और काशी की पहचान है। इतिहास में इस पर कई बार हमले हुए और इसका पुनर्निर्माण भी हुआ। वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 में इंदौर की रानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। हाल के वर्षों में बने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने मंदिर को गंगा घाट से सीधे जोड़ दिया है।डिजाइन फोटो
Dashashwamedh Ghat
शाम को होने वाली गंगा आरती यहाँ का सबसे चर्चित आकर्षण है। दीपों की कतार, शंखनाद और मंत्रोच्चार से पूरा घाट भक्तिमय हो जाता है। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने यहाँ दस अश्वमेध यज्ञ किए थे, इसी से घाट का नाम पड़ा। आरती के समय भीड़ बढ़ जाती है, इसलिए थोड़ा पहले पहुँचना अच्छा रहता है।डिजाइन फोटो
Assi Ghat The freshness of Subah-e-Banaras
शहर के दक्षिणी छोर पर स्थित अस्सी घाट गंगा और अस्सी नदी के संगम के पास माना जाता है। यहाँ सुबह के समय संगीत, योग और आरती के कार्यक्रम होते हैं, जो शांति और ऊर्जा दोनों देते हैं। संत तुलसीदास से भी इस क्षेत्र का नाम जुड़ा बताया जाता है। यह घाट छात्रों, कलाकारों और विदेशी सैलानियों की पसंदीदा जगह है।source: Pinterest
Manikarnika Ghat
मणिकर्णिका घाट बनारस के सबसे पुराने और प्रसिद्ध घाटों में से एक है। मान्यता है कि यहाँ का अंतिम संस्कार मोक्ष की ओर ले जाता है और यहाँ चिताएँ दिन-रात जलती रहती हैं। यह स्थान जीवन की नश्वरता का गहरा एहसास कराता है। यहाँ जाएँ तो श्रद्धा और संवेदनशीलता का ध्यान रखें और तस्वीरें लेने से बचें।डिजाइन फोटो
Sarnath
बनारस शहर से लगभग 10 किलोमीटर दूर सारनाथ बौद्ध धर्म के चार प्रमुख तीर्थों में गिना जाता है। माना जाता है कि ज्ञान प्राप्ति के बाद गौतम बुद्ध ने यहीं पहली बार धर्म का उपदेश दिया। यहाँ धमेख स्तूप, मूलगंध कुटी विहार और सम्राट अशोक के काल के अवशेष देखे जा सकते हैं। भारत का राष्ट्रीय चिह्न अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष यहीं से मिला था, जो अब सारनाथ संग्रहालय में है।डिजाइन फोटो
BHU and the New Vishwanath Temple
काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना 1916 में पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। यह एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालयों में गिना जाता है। परिसर में बना नया विश्वनाथ मंदिर अपनी भव्य सफ़ेद संरचना के लिए जाना जाता है। हरे-भरे परिसर में टहलना भी एक सुकून भरा अनुभव है।डिजाइन फोटो
Ramnagar Fort
गंगा के दूसरे किनारे पर बना यह किला अठारहवीं सदी में काशी नरेश के संरक्षण में बना माना जाता है। यहाँ का संग्रहालय पुरानी बग्घियों, हथियारों, वस्त्रों और शाही सामान के लिए जाना जाता है। यह किला काशी राजपरिवार की परंपराओं से जुड़ा हुआ है। नाव या पुल से यहाँ पहुँचा जा सकता है।डिजाइन फोटो
Sankat Mochan Hanuman Temple
माना जाता है कि संकट मोचन मंदिर की स्थापना बीसवीं सदी की शुरुआत में हुई। यहाँ मंगलवार और शनिवार को भक्तों की भीड़ रहती है। हर साल यहाँ संकट मोचन संगीत समारोह होता है, जिसमें देश के बड़े शास्त्रीय कलाकार प्रस्तुति देते हैं। इसे बनारस की सांस्कृतिक परंपरा का जीवंत उदाहरण माना जाता है।डिजाइन फोटो
Durga Temple and Tulsi Manas Temple
लाल रंग के पत्थरों से बना दुर्गा मंदिर बनारस के लोकप्रिय मंदिरों में है। इसके पास का तुलसी मानस मंदिर संगमरमर से बना है और इसकी दीवारों पर रामचरितमानस की चौपाइयाँ उकेरी गई हैं। यह मंदिर गोस्वामी तुलसीदास की स्मृति से जुड़ा है। दोनों मंदिर पास-पास हैं, इसलिए एक साथ घूमे जा सकते हैं।डिजाइन फोटो
The lanes of Banaras: Flavors, sarees, and culture
बनारस सिर्फ़ मंदिरों और घाटों का नहीं, गलियों का भी शहर है। यहाँ कचौरी-जलेबी, ठंडाई और मलाइयो जैसे स्वाद मिलते हैं। बनारसी साड़ी की बुनाई इस शहर की पारंपरिक कला है। घाटों के किनारे संकरी गलियों में घूमते हुए शहर की असली धड़कन महसूस होती है। नाव की सवारी और घाटों पर सुबह की सैर भी यात्रा का यादगार हिस्सा बन सकती है।डिजाइन फोटो

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