भारत में यहां पर स्थित हैं सबसे प्राचीन और विशाल वटवृक्ष, जानिए इसके बारे में रोचक तथ्य
इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है और सदा सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद मांगती है। इस व्रत में बरगद के पेड़ की महिमा होती है वहीं पर यानि वट वृक्ष की पूजा की जाती है।
- Written By: दीपिका पाल
Vat Savitri Vrat 2025: 26 मई को वट सावित्री व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती है और सदा सौभाग्यवती रहने का आशीर्वाद मांगती है। इस व्रत में बरगद के पेड़ की महिमा होती है वहीं पर यानि वट वृक्ष की पूजा की जाती है। इस तरह ही भारत में ऐसे कई बड़े और प्राचीन वट वृक्ष मौजूद है जिसकी मान्यता और परंपरा खास होती है।
गया का वट वृक्ष- देश के सबसे बड़े और प्राचीन वट वृक्ष की बात की जाए तो, इसे बिहार का पवित्र पुनीत वट वृक्ष कहा जाता है। यह अक्षयवट गया-बोधगया मार्ग पर स्थित माऊनपुर मोड़ से आधा किमी दूर है। इस स्थान पर एक तरफ गदालाल वेदी और दूसरी ओर माता मंगला गौरी का प्रसिद्ध मंदिर व भव्य कूट पर्वत है। बताया जाता है कि, इस वट वृक्ष का उद्धार ब्रम्हाजी द्वारा किया गया था वहीं पर माता सीता ने इस वट वृक्ष को अक्षय यानि कभी क्षय नहीं होने वाला दिया था।
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वृंदावन का वट वृक्ष- दूसरा सबसे बड़े वट वृक्ष वृंदावन में स्थित है। जहां पर वृंदावन में इसे वंशीवट के नाम से जाना जाता है। इस वट वृक्ष को लेकर एक प्राचीन तथ्य मिलते है। कहा जाता है कि, इसे श्रीमाधव का शास्त्रोमुक्त स्थान कहा जाता है।मान्यता है कि यहां वैष्णव संत चैतन्य महाप्रभु ने दर्शन किए थे।
प्रयागराज का वट वृक्ष- महाकुंभ के समय इस वट वृक्ष की चर्चा हुई है। जहां पर इसे अक्षयवट के नाम से जाना जाता है। इसे लेकर कहा जाता है कि, अकबर-कालीन विशाल किले के अंदर विशाल वट वृक्ष है, जिसे मनोरथ वट कहा जाता है। इसके अलावा इसे लेकर कहा जाता है कि, पहले किले की पातालपुरी गुफा में एक सूखी डाली गाड़कर उसमें कपड़ा लपेट के अक्षयवट के रूप में पूजा होती थी, लेकिन बाद में यमुना किनारे इस की मूल स्थिति का ज्ञान हुआ। अक्षयवट का नाता चीनी यात्री ह्वेनसांग से भी मिलता है।
पुरी का वटवृक्ष- ओड़िसा का जगन्नाथ पुरी मंदिर प्राचीन काल का सबसे प्राचीन कल्पतरू है जो नीलाचंल पर्वत पर स्थित है। कहा जाता है कि,मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी वनवास के दौरान कुछ समय के लिए यहां रहे थे। इस कारण इस स्थान को वनस्थली भी कहा जाता है।
पंचवटी -यहां पर सबसे प्राचीन वट वृक्ष में छत्तीसगढ़ का सबसे प्राचीन वट वृक्ष आता है। जहां पीपल, बेल, वट, हड़ और अशोक ये पांच वृक्ष लगे होते हैं। छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य क्षेत्र में भी एक पंचवटी स्थित है, जो जगदलपुर से 62 किमी दूरी पर है। इसे सबसे प्राचीन वट वृक्ष के रूप में जाना जाता है।
