

Bhupen Kumar Bora: असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा का भाजपाई होना तय हो चुका है। बीते कल तक वे किसी का नाम लेकर आरोप लगाने से बच रहे थे, लेकिन आज यानी बुधवार को उन्होंने खुलकर पूरी कहानी बयां कर दी है। इस दौरान उन्होंने असम कांग्रेस के सबसे बड़े चेहरे पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
सोमवार को कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले भूपेन कुमार बोरा को मनाने में कांग्रेस नाकाम रही है। अब कहा जा रहा है कि 22 फरवरी को वह भाजपा ज्वाइन करेंगे। पहले उन्होंने इस्तीफा वापसी के संकेत दिए थे, मंगलवार की शाम को हिमंत बिस्व सरमा से मुलाकात के बाद उन्होंने इरादा बदल दिया है।
इस बीच बुधवार को भाजपा ज्वाइन करने की ख़बरों की पुष्टि करते हुए भूपेन बोरा ने कहा कि वह हिमंत के घर जाकर इस विषय में बात करने वाले हैं। इस दौरान उन्होंने पहली बार कांग्रेस पर खुलकर हमला बोला है। बोरा ने कहा कि गठबंधन की बातचीत को लेकर गौरव गोगोई ने उन्हें जलील किया था।
दूसरी तरफ भूपेन बोरा के आरोपों पर गौरव गोगोई ने कहा है कि यह सब भाजपा ज्वाइन करने का बहाना है। जो भी बीजेपी ज्वाइन करता है उसे एक स्क्रिप्ट दी जाती है और वही उसे पढ़नी रहती है। गौरतलब है कि कुमार बोरा दो बार के विधायक और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहे हैं। उन्हीं को हटाकर गौरव गोगोई को असम की कमान दी गई थी।
2021 की घटनाओं का जिक्र करते हुए भूपेन बोरा ने कहा, "मैंने कांग्रेस को 32 साल दिए। कांग्रेस ने मुझे विधायक से AICC सेक्रेटरी और APCC प्रेसिडेंट बनाया। मैं कांग्रेस में इसलिए शामिल हुआ, क्योंकि 1926 के AICC सेशन में मेरे दादाजी ने पंडाल का शामियाना बनाने के लिए हजारों गमछे बिछा दिए थे। बोरा ने आगे कहा कि जब मैं 2021 में असम कांग्रेस का अध्यक्ष बना तो कांग्रेस AIUDF के साथ अलायंस में थी। मैंने वह अलायंस तोड़ दिया और असम में 16 पार्टियों को मिलाकर एक कोएलिशन बनाया। जब पांच असेंबली सीटों के लिए बाय-इलेक्शन आए तो CPI (ML) को एक सीट देने का फैसला हुआ। मैं भी इस पर राजी हो गया।
उन्होंने कहा कि मैंने सबसे सलाह-मशविरा करने के बाद यह फैसला किया, लेकिन रात में अचानक ऐलान हुआ और कांग्रेस का टिकट एक ऐसे व्यक्ति को दे दिया गया जो कभी कांग्रेस का मेंबर नहीं रहा। अलायंस पार्टनर्स ने सवाल उठाए 'क्या आप हमें पांच में से एक सीट नहीं दे सकते?' मैं इसमें फेल हो गया और मैंने इस्तीफा दे दिया। यह सब होने को बावजूद मैं चुप रहा क्योंकि इससे पार्टी को नुकसान हो सकता था।
गोगोई को निशाना बनाते हुए बोरा ने कहा कि बीती 9 फरवरी को एक नया अलायंस बनाने के लिए एक वीडियो कॉन्फ्रेंस हुई। जितेंद्र सिंह और दूसरे नेता मौजूद थे। यह तय हुआ कि भूपेन बोरा अलायंस बनाएंगे। मैंने मना कर दिया, लेकिन मुझसे जबरदस्ती कहा गया कि मुझे यह करना होगा।
इसके बाद 10 फरवरी को बातचीत शुरू हुई और 11 फरवरी को मुझे गौरव गोगोई का कॉल आ गया। उन्होंने मुझसे कहा कि दादा आपको अकेले नहीं रहना चाहिए, रकीबुल हसन को भी साथ ले जाना चाहिए। जिसके जवाब में मैने कहा कि यह तो मीटिंग का फैसला नहीं था।
फिर कुछ ही देर बाद मुझे प्रद्युत बोरदोलोई ने फोन किया और कहा, 'अगर आप ऐसा करते हैं, तो मैं इसकी इजाजत नहीं दूंगा।' इसके बाद देबब्रत सैकिया ने कहा कि आपको मीटिंग में जो तय हुआ है उसके अनुसार काम करना चाहिए। ऐसे में मुझे क्या करना चाहिए और कहां जाना चाहिए?
बोरा ने बताया कि इस सब के बावजूद वह काम करते रहे और बात करते रहे। मिलने के लिए एक समय और जगह तय की गई। उन्होंने अखिल गोगोई और लुरिन गोगोई को एक साथ बुलाया, लेकिन कुछ ही देर बाद गौरव गोगोई ने ऐलान कर दिया कि भूपेन बोरा ने ग़लतफहमी पैदा की है। वह अकेले नहीं रकीबुल हसन भी उनके साथ हैं।
पूर्व APCC अध्यक्ष ने कहा कि मैंने पूछा कि उन्होंने यह सबके सामने क्यों कहा? आपने मुझे सबके सामने बेइज्जत क्यों किया? मैंने पहले गौरव गोगोई को एक लेटर लिखा था और उनसे कहा था कि वे मुझे आपके खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए मजबूर न करें। मैंने इन बातों के बारे में हाईकमान को भी बताया था, लेकिन कोई जवाब नहीं आया।