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यवतमाल में न्यायालयीन सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याणकारी संस्था ने 17 अक्टूबर को महात्मा फुले चौक पर एक दिवसीय धरना दिया।
मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा 31 जनवरी 2025 को भेजा गया वेतन संशोधन प्रस्ताव अब तक राज्य सरकार के स्तर पर लंबित है।
कर्मचारियों के अनुसार, प्रस्ताव मंजूर नहीं होने से वेतन निश्चिती, पेंशन और अन्य आर्थिक लाभ प्रभावित हो रहे हैं।
Yavatmal Retired Court Employees Protest: न्याय व्यवस्था में जीवनभर ईमानदारी से सेवा देने वाले न्यायालयीन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब अपने ही वेतन संबंधी अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। समान काम, समान वेतन के सिद्धांत के अनुरूप वेतनश्रेणी में संशोधन का प्रस्ताव पिछले 20 महीनों से शासन स्तर पर लंबित होने के कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
इस मांग को लेकर शनिवार, 17 अक्टूबर को यवतमाल में न्यायालयीन सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याणकारी संस्था की ओर से महात्मा फुले चौक में एक दिवसीय धरना आंदोलन किया गया। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में न्यायालयीन सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हुए।
आंदोलनकारियों के अनुसार, मुंबई उच्च न्यायालय ने 31 जनवरी 2025 को अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों की संशोधित वेतनश्रेणी का प्रस्ताव राज्य सरकार को प्रस्तुत किया था।
हालांकि, अब तक इस संबंध में शासन निर्णय जारी नहीं किया गया है। इसके कारण सेवानिवृत्त कर्मचारियों की वेतन निश्चिती, पेंशन तथा अन्य आर्थिक लाभ प्रभावित हो रहे हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में अपनी मांगें रखी गईं। इस आंदोलन का नेतृत्व न्यायालयीन सेवानिवृत्त कर्मचारी कल्याणकारी संस्था के अध्यक्ष निरंजन होले, उपाध्यक्ष नरेंद्र चंदेले एवं राजेंद्र संभे, सचिव सैय्यद असमतुल्ला, सहसचिव नारायण गावंडे, कोषाध्यक्ष महादेव दा. भेदोडकर आदि ने किया।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि वेतन संशोधन का प्रस्ताव शीघ्र मंजूर नहीं किया गया, तो 5 नवंबर से श्रृंखलाबद्ध अनशन शुरू किया जाएगा। साथ ही, कार्यरत और सेवानिवृत्त न्यायालयीन कर्मचारी अपने परिवारों के साथ इस वर्ष दीपावली नहीं मनाने का निर्णय लेने की बात भी ज्ञापन में कही गई है। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से तत्काल हस्तक्षेप कर न्यायालयीन कर्मचारियों को न्याय दिलाने तथा वेतन संशोधन के प्रस्ताव को शीघ्र मंजूरी देने की मांग की।