यवतमाल. पुलिस विभाग का कामकाज बेहतर से बेहतर बनाने के लिए जिला पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में नई संकल्पना अमल में लाई जा रही है . हाल ही में जिले के सभी पुलिस थाना क्षेत्र में स्पेशल ड्राइव चलाया गया. स्पेशल ड्राइव सहित अच्छा काम करने वाले पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों को सम्मानित करने के लिए फिरते चषक चलाये जाने के बारे में अप्पर पुलिस अधीक्षक पीयूष जगताप ने पत्रकार परिषद में जानकारी दी .
पत्रकार परिषद में अपर पुलिस अधीक्षक जगताप ने बताया कि जिला पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में जिले के सभी थाना प्रशासन की ओर से एक्शन मोड पर काम किया गया. मिसिंग महिला , लड़के लड़कियों को ढूंढ कर परिजनों के सुपुर्द किया गया. 11 से 26 नवंबर तक चलाए गए मिसिंग ट्रेस आउट में 243 मिसिंग मामले सुलझाए गए. वहीं अनेक अपराधों की 2000 एप्लीकेशन पेंडिंग थी. एप्लीकेशन स्पेशल ड्राइव चलाते हुए 1200 एप्लीकेशन डिस्पोजल कराई गई. ₹29000 का माल पुलिस प्रशासन की ओर से जप्त किया गया था . 15 से 28 नवंबर के बीच 5300 रुपए का माल नष्ट किया गया.
लूटपाट किए गए सोना चांदी ,नगद लौटाने का काम पूरा किया जा चुका है. 28 मामलों में 23 लाख रुपयों का माल शिकायतकर्ताओं को लौटा दिया गया है. स्पेशल ड्राइव चलाते हुए यह काम किया जा रहा है . बीते 1 सप्ताह में सभी थानो से रिकवरी की गई है. स्पेशल मोड पर काम किया जा रहा है. आने वाले दिसंबर महीने से प्रत्येक थानाधिकारी वह कर्मचारियों के बेहतरीन काम को देखते हुए फिरते चषक शुरू किया गया है . इसके तहत अधिकारी व कर्मचारी के बेहतर कार्य को देखते हुए उनको सम्मान चिन्ह , प्रमाण पत्र और थाने को फिरता चषक देकर सम्मानित किया जाएगा .
अपर पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सीसीटीएनएस प्रणाली में बेहतर कार्य करने के लिए पुसद शहर थाने को पहला नंबर दिया गया है. इसी तरह विविध अपराधों में माल जप्त करने की प्रक्रिया में बेहतर काम करने पर नेर पुलिस को सम्मान मिला है . वही नेर पुलिस को ही बेस्ट इन्वेस्टिगेशन के लिए पहला पुरस्कार दिया गया है . दोष सिद्धि का प्रमाण बढ़ाने के लिए उमरखेड पुलिस थाने को पहला पुरस्कार दिया गया है. अब आगे से पुलिस शासन की ओर से अपराध मामलों को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए विशेष कदम भी उठाए जा रहे हैं.
जिसके तहत प्रत्येक थानेदार को अपने अपने क्षेत्र का एक मामला दत्तक लेना होगा और उसे सुलझाना होगा. एसडीपीओ को भी 2 केसेस लेकर सुलझाना होगा. साइबर सेल की सतर्कता से एक व्यक्ति की 9 लाख रुपयों की रकम जालसाज के खाते में जाने से बाल-बाल बच गई. एसबीआई के कर्मचारी स्वप्निल को तुरंत जानकारी साइबर सेल से मिलने के बाद उसने तुरंत तत्परता दिखाते हुए शिकायतकर्ता के खाते को होल्ड कर दिया. जिससे उसकी रकम जालसाज के खाते में जाने से बाल-बाल बच गई.