आदिवासी नहीं वनवासी? बयान को लेकर यवतमाल में बवाल, बिरसा ब्रिगेड का विरोध, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
Yavatmal Protest News: यवतमाल में बिरसा ब्रिगेड ने अमित शाह के कथित ‘वनवासी’ बयान का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की।
- Written By: अंकिता पटेल
यवतमाल प्रदर्शन, बिरसा ब्रिगेड, आदिवासी समाज,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Yavatmal Protest Tribal Community: यवतमाल बिरसा ब्रिगेड महाराष्ट्र राज्य संगठन की ओर से शुक्रवार को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर प्रदर्शन कर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शहा के कथित बयान का विरोध किया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के नाम जिलाधिकारी यवतमाल के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए उचित कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में कहा गया कि 24 मई को दिल्ली में आयोजित जनजातीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने भाषण में आदिवासी समाज को “वनवासी” कहकर संबोधित किया, जिससे आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।
संगठन का कहना है कि आदिवासी इस देश के मूलनिवासी हैं और देश की आजादी की लड़ाई में हजारों आदिवासी क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया है। बिरसा ब्रिगेड ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और संवैधानिक पहचान होने के बावजूद उन्हें “वनवासी” कहना अपमानजनक है।
ज्ञापन में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट भी विभिन्न मामलों में आदिवासियों को इस देश का मूलनिवासी मान चुका है। ऐसे में उन्हें “वनवासी” कहना उनकी अस्मिता और स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने “वनवासी नहीं, हम आदिवासी हैं, इस देश के मूलनिवासी हैं” जैसे नारे लगाए। संगठन ने कहा कि आदिवासी समाज को सम्मान और समान अधिकार मिलना चाहिए तथा उनकी पहचान के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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यह ज्ञापन बिरसा ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुलमेथे के मार्गदर्शन में जिलाध्यक्ष प्रा. वसंत कनाके के नेतृत्व में सौंपा गया। इस दौरान शामादादा ब्रिगेड के अध्यक्ष शैलेश गाडेकर, सुमित आत्राम, पंकज मडावी, सूरज मरस्कोल्हे, मधुकर मडावी, सामाजिक कार्यकर्ता आकाश मेटकर, सुंदर यादव सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष कार्यकर्ता उपस्थित थे।
‘वनवासी’ शब्द पर आदिवासी कांग्रेस का विरोध
अमित शाह के ‘वनवासी’ शब्द का तीव्र विरोध मारेगांव (सं) आदिवासी को ‘वनवासी’ कहे जाने के विरोध में आदिवासी कांग्रेस की ओर से देश के गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ तीव्र विरोध प्रदर्शन किया गया। साथ ही उनके खिलाफ अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई। तहसीलदार के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कहा गया कि आदिवासी समाज इस देश का मूल निवासी है तथा जल, जंगल और जमीन का वास्तविक अधिकार उसी का है।
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आदिवासी समाज की अपनी अलग पहचान, संस्कृति, परंपरा और इतिहास है। स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी वीरों के योगदान और बलिदान को भी उल्लेखनीय बताया गया। इस दौरान डॉ. शैलेश आत्राम, तुलशीराम कुमरे, मंगेश उईके, गजानन मडावी, तुलशीराम पेंदोर, तुलशीराम मडावी, अंकुश माफुर, मनोहर राऊत, मुरलीधर जुमनाके और भय्याजी कनाके सहित कई पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।
आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची
यवतमाल, घाटंजी तहसील के सकल आदिवासी समाज ने तीव्र नाराजगी व्यक्त की। समाज के लोगों का कहना है कि इस शब्द प्रयोग से देशभर के करोड़ी आदिवासी समाज की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसी के विरोध में गुरुवार 29 मई को घाटंगी तहसील के सकल आदिवासी समाज के पदाधिकारी और नागरिक एकत्रित हुए तथा तहसीलदार घाटंजी के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर घटना की निंदा की।
इस दौरान जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष माणिकराव मेश्राम, युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष आकाश आत्राम, बिरसा ब्रिगेड तहसील अध्यक्ष उमेश कुडुमते, उपाध्यक्ष कुंडलिकराव आत्राम, सरपव जयतुजे मेश्राम, बंडू तोडसाम, कैलास कोरवते, मधुकर घोडाम, बलिराम उईके, सौरभ मरसकोल्हे, सुनील मेश्राम, सुनील आडे, मयूर येवले, नंदकुमार देवतले सहित तहसील के कई सरपंच एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।
