यवतमाल में गाद निकासी कार्य पर सवाल, फर्जी भुगतान और अनियमितताओं की जांच की मांग
Dam Removal Scam: यवतमाल में 'दलदलमुक्त बांध' योजना में भ्रष्टाचार का आरोप। मनसे के अभिजीत नानवटकर ने जियो-टैग सबूतों के साथ डीएम को ज्ञापन सौंपकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
- Written By: केतकी मोडक
भ्रष्टाचार प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
Pond Desilting Corruption Yavatmal: महाराष्ट्र शासन की दलदलमुक्त बांध व दलदलयुक्त परिसर योजना के तहत यवतमाल जिले में हुए कथित भ्रष्टाचार, फर्जी भुगतान, बिना वास्तविक कार्य किए निधि निकासी, सूचना छिपाने तथा जलाशयों से निकाली गई गाद की अवैध बिक्री के मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने की मांग महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना के अध्यक्ष अभिजीत नानवटकर ने जिलाधिकारी यवतमाल को दिए ज्ञापन के माध्यम से की है।
ज्ञापन की प्रतियां विभागीय आयुक्त, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अधीक्षक अभियंता, यवतमाल पुलिस अधीक्षक तथा भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को भी भेजी गई हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि घाटंजी तहसील के झटाला, घोटी और मारेगांव स्थित तालाबों में गाद निकासी का कार्य किए बिना केवल उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित कर योजना का दिखावा किया गया।
धांधली का आरोप
संबंधित कार्य एक बहुउद्देशीय संस्था को सौंपा गया था, लेकिन उद्घाटन के कई महीनों बाद तक वास्तविक रूप से गाद निकासी नहीं की गई, ऐसा स्थानीय किसानों और नागरिकों का कहना है। नानवटकर ने दावा किया है कि झटाला तालाब में गाद निकासी कार्य का उद्घाटन 28 मार्च 2025 को किया गया था, जिसका जियो-टैग फोटो उपलब्ध है।
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जबकि वास्तविक गाद निकासी कार्य 25 सितंबर 2025 को किए जाने के जियो-टैग प्रमाण मौजूद हैं, इससे उद्घाटन और कार्य प्रारंभ होने के बोच लगभग छह महीने का अंतर सामने आता है, जिससे कार्य की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सूचना के अधिकार के तहत संबंधित कार्यों की जानकारी मांगे जाने पर विभाग द्वारा टालमटोल की गई। कितना गाद निकाला गया, किन किसानों को उसका लाभ मिला तथा कितनी राशि खर्च की गई, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे पूरे मामले पर संदेह और महरा गया है।
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फर्जी रिकार्ड तैयार
ज्ञापन में बिना कार्य किए लाखों रुपये के भुगतान निकालने, मापन पुस्तिका और लाभार्थी सूची में हेरफेर करने, गाद निकासी का झूठा रिकॉर्ड तैयार करने, गाद की अवैध बिक्री करने, बिना भौतिक सत्यापन भुगतान स्वीकृत करने तथा जानकारी छिपाने जैसी गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि यह योजना किसानों और जल संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और गहन जांच कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
