

Nagpur Weekly Market Road Encroachment: स्मार्ट सिटी बनने जा रहे अरिंज सिटी में आज भी साप्ताहिक और रोज लगने वाले बाजारों की हालत बद से बदतर है। महानगर के कई हिस्सों में लगने वाले साप्ताहिक बाजार तो रोड पर साकार होते हैं। प्रशासन द्वारा इन बाजारों के लिए जगह मुहैया नहीं कराये जाने के कारण मजबूरीवश व्यापारियों को सड़कों पर ही अपनी दुकानें सजानी पड़ती है।
सड़कों पर लगने वाले इन मार्केट्स के चलते कई बार दुर्घटनाएं हुई भी हैं लेकिन इसके बाद भी प्रशासन की कुंभकर्णी नींद नहीं खुलती। मार्केट सड़कों पर लगने से स्थिति इतनी अधिक विकराल हो जाती है कि घंटों तक जाम की स्थिति बनती है। इससे वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों को काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है।
वहीं जहां बाजार के लिए जगह है वहां की स्थिति और भी अधिक खराब है। इस कारण आधे से ज्यादा व्यापारी मार्केट से बाहर दुकानें लगाते हैं। प्रशासन की उदासीनता के कारण आज आधुनिक बाजार की प्लानिंग ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। व्यापारियों ने कई बार स्थायी मार्केट बनाने के लिए प्रशासन से मांग की, लेकिन इस पर कभी ध्यान नहीं दिया गया।
कई बार प्रशासन की आधुनिक साप्ताहिक बाजार बनाने के लिए बैठकें होने के साथ प्रस्ताव भी निकल चुके हैं लेकिन इस पर किसी तरह का अमल नहीं किये जाने के चलते आज यह केवल महज दिखावे की तरह लगता है। इतने वर्षों में न तो कजारों की हालत सुधरी है और न ही किसी साप्ताहिक बाजार के लिए जगह मुहैया कराई गई है। आज देखा जाए ती उदयनगर चौक से मानेवाडा चौक, हसनजाग बेलतरोडी, बेसा, सदर, सक्करदरा का बुधवारी बाजार, वर्धा रोड, हिंगना, पिंपला रोड, हुडकेश्वर रोड, मनीषनगर, पारडी सहित शहर के विविध क्षेत्रों मैं सड़कों पर बाजार साप्ताहिक बाजार साकार होते है। सड़कों पर लगने वाले यह बाजार स्मार्ट सिटी के लिए बदनुमा दाग बनते जा रहे हैं।
बाजार खत्म होने के बाद व्याधारी सड़कों पर ही बचा खुचा माल और सब्जी का कचरा फेंक देते हैं। इसके कारण सड़कों पर जानवरों का मजमा लग जाता है। कई बार इन मवेशियों के कारण भी दुर्घटनाएं होती है।
बाजारों के कारण लगने वाले जाम से वाहन चालकों को सुचारु यातायात के लिए ट्रैफिक पुलिस विभाग द्वारा भी कुछ नहीं किया जाता, इससे घंटों तक जाम की स्थिति बनी रहती है।