Washim District News: अकोला जिले के विभाजन के बाद अस्तित्व में आए वाशिम जिले को बने 27 वर्ष 8 महीने पूरे हो चुके हैं, लेकिन अब भी जिले का अपेक्षित विकास अधूरा ही नजर आता है। जिला मुख्यालय की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, जिससे नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है।
करीब तीन दशक बीतने के बाद भी वाशिम शहर बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। कुछ नए विकसित क्षेत्रों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश हिस्सों में सड़कें जर्जर हैं और मूलभूत ढांचा कमजोर बना हुआ है।
जिले में बढ़ती बेरोजगारी, बड़े उद्योगों का अभाव और उच्च शिक्षा संस्थानों की कमी प्रमुख समस्याएं बनी हुई हैं। शहर की जलापूर्ति से जुड़ा एकबुर्जी तालाब का ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव वर्षों से लंबित है, जबकि करोड़ों रुपये की लागत से बना गार्डन अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
इसके अलावा शहर की ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था शुरू होने से पहले ही निष्क्रिय होने की स्थिति में है। विश्वविद्यालय उपकेंद्र स्थापित करने का मामला भी ठंडे बस्ते में है। सिंचाई परियोजनाओं का विस्तार न होने से कृषि क्षेत्र भी प्रभावित है।
जिला ‘आकांक्षी’ श्रेणी में शामिल होने के बावजूद विकास की रफ्तार धीमी है। जिले में जनप्रतिनिधियों की संख्या पर्याप्त होने के बाद भी ठोस विकास कार्यों की कमी महसूस की जा रही है।
सहकार क्षेत्र की स्थिति भी कमजोर बनी हुई है और लंबे समय से सुधार की प्रतीक्षा कर रही है। नागरिकों का कहना है कि आश्वासनों के बजाय ठोस कार्यों की जरूरत है, ताकि जिले को उपेक्षित क्षेत्र की छवि से बाहर निकाला जा सके।
जिला मुख्यालय सहित पूरे वाशिम में अब यह सवाल उठ रहा है कि विकास की राह में आ रही बाधाएं आखिर कब दूर होंगी।