चंद्रपुर में नकली कपास बीज पर बड़ी कार्रवाई, बिना लाइसेंस बीज भंडारण पर एक्शन; 86 हजार का माल जब्त

Chandrapur Fake Cotton Seeds: चंद्रपुर के वरोरा में कृषि विभाग ने गुप्त सूचना पर कार्रवाई कर 86 हजार रुपये से अधिक कीमत के कथित नकली हायब्रीड कपास बीज जब्त किए। मामले में पुलिस प्रकरण दर्ज हुआ है।
Major Crackdown on Fake Cotton Seeds in Chandrapur: Action Taken Against Unlicensed Seed Storage; Goods Worth ₹86,000 Seized
चंद्रपुर, नकली कपास बीज, (सोर्स: सौजन्य AI)
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Chandrapur llegal Cotton Seeds Trade: चंद्रपुर जिले की वरोरा तहसील में कृषि विभाग ने नकली कपास बीज के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए शेगांव बुजुर्ग गांव में एक घर से 86 हजार रुपये से अधिक कीमत के हायब्रीड कपास बीज जब्त किए हैं। यह कार्रवाई कृषि विभाग के उड़नदस्ता दल द्वारा गुप्त सूचना के आधार पर की गई। मामले में बिना लाइसेंस बीज भंडारण, अवैध बिक्री की तैयारी और संबंधित कानूनों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस में प्रकरण दर्ज किया गया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध बीज कारोबार को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मंगलवार को कृषि विभाग वरोरा के कृषि अधिकारी एवं गुणवत्ता नियंत्रण अधिकारी मारोती वरभे को गुप्त सूचना मिली थी कि शेगांव बुजुर्ग गांव में एक व्यक्ति द्वारा कथित रूप से अवैध और संदिग्ध कपास बीज का भंडारण किया गया है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग के उड़नदस्ता दल ने तत्काल छापेमारी की योजना बनाई और गांव में स्थित मितेश किशोर पारोधे के घर पर दबिश दी।

जांच के दौरान अधिकारियों को घर में दो सफेद प्लास्टिक की बोरियां संदिग्ध अवस्था में मिलीं। जब इन बोरियों की बारीकी से जांच की गई तो उनमें बड़ी मात्रा में कपास बीज के पैकेट पाए गए। अधिकारियों के अनुसार, एक बैग पर “छावा” नाम लिखा हुआ था, जिसमें “छावा हायब्रीड कपास बीज 5जी काइंड हायब्रीड कॉटन वैरायटी” नामक पैकेट मौजूद थे। वहीं दूसरी ओर “टूरिस्ट” नाम की बैग की तलाशी लेने पर भी हायब्रीड कपास बीज के कई पैकेट बरामद हुए।

कृषि विभाग द्वारा की गई गिनती और जांच में कुल 96 पैकेट हायब्रीड कपास बीज जब्त किए गए। इन बीजों की अनुमानित कीमत 86 हजार 496 रुपये बताई गई है। प्राथमिक जांच में यह सामने आया कि बीजों का भंडारण बिक्री के उद्देश्य से किया गया था। अधिकारियों ने पाया कि जब्त किए गए बैगों और पैकेटों पर किसी अधिकृत बीज उत्पादक कंपनी का नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं था, जिससे बीजों की गुणवत्ता और वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

नकली बीज नेटवर्क की जांच तेज, बड़े रैकेट की आशंका

पूछताछ के दौरान मितेश किशोर पारोधे ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह यह बीज वर्धा जिले के सेलू तहसील निवासी टेकाडे नामक व्यक्ति से लेकर आया था। हालांकि, कृषि विभाग अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि यह बीज किस स्रोत से तैयार किए गए थे और क्या इनके जरिए बड़े स्तर पर अवैध बिक्री का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।

कृषि अधिकारियों का कहना है कि बिना लाइसेंस बीजों का भंडारण और बिक्री करना कानूनन अपराध है। विशेष रूप से कपास जैसे महत्वपूर्ण फसल बीजों में यदि गुणवत्ता मानकों का पालन नहीं किया जाए, तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। नकली या अप्रमाणित बीजों के कारण फसल उत्पादन प्रभावित होता है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है।

नकली कपास बीज मामले में केस दर्ज, किसानों को सतर्क रहने की अपील

इसी को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग ने मामले को गंभीर मानते हुए मितेश पारोधे के खिलाफ शेगांव पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। आरोप है कि आरोपी ने बिना वैध अनुमति कपास बीजों का भंडारण किया तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम सहित अन्य संबंधित प्रावधानों का उल्लंघन किया। पुलिस ने विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

कृषि विभाग ने किसानों से भी अपील की है कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से प्रमाणित बीज ही खरीदें तथा किसी भी संदिग्ध या बिना कंपनी नाम वाले बीज की सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और किसानों को नुकसान से बचाया जा सके।

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