

हिंगनघाट (सं). यूक्रेन-रशिया के बीच चल रहे विवाद में देश के अनेक विद्यार्थी यूक्रेन में फंसे हुए है़ इनमें हिंगनघाट का यश मोटवानी शामिल था़ अथक प्रयास व बिकट स्थिति से गुजरते हुए यश सकुशल अपने घर वापस लौटा है़ पुत्र के सही सलामत घर आने से माता-पिता सहित परिजनों ने राहत की सांस ली है.
युध्द के कारण यूक्रेन में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे है़ं इस स्थिति में भारत के सैकड़ों विद्यार्थी वहां फंसे हुए है़ उन्हें वापस लाने केंद्र सरकार ने मुहिम शुरू कर दी है़ इन विद्यार्थियों को रोमानिया की सीमा से हवाई जहाज के जरिए देश में लाया जा रहा है. शहर का यश विनोद मोटवानी यह मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने यूक्रेन गया था़ वैद्यकीय शाखा के 5 वें वर्ष में डेनप्रो स्थित नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में वह अध्ययनरत था़ यहां से ओडेसा का हवाईअड्डा समीप था़
यश ओडेसा से ही वापस आने वाला था़ किन्तु युध्द की स्थिति से ओडेसा से हवाई सेवा बंद कर दिया गया. यश यूक्रेन में फंस गया़ पश्चात वह कुछ मित्रों के साथ ओडेसा में कुछ दिन किराये के मकान में रहा़ छत्तीसगढ़ व रायपुर के अपने मित्रों को साथ लेकर ओडेसा से 600 किमी का सफर करते हुए निजी वाहन से रोमानिया तक पहुंचा़ परंतु यहां वाहनों की काफी भीड़ होने से 10 किमी की दूरी पर ही उन्हें उतार दिया गया़ चुभनभरी ठंड में किसी तरह पैदल मित्रों के साथ रोमानिया की सीमा तक पहुंचा़ उचित प्रक्रिया के बाद उन्हें रोमानिया प्रशासन ने भीतर प्रवेश दिया.
1 मार्च की सुबह 1 बजे हवाई जहाज से यश मुंबई के हवाई अड्डे पर पहुंचा़ जहां सभी यात्रियों के खानपान की व्यवस्था की गई़ सभी विद्यार्थियों का केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने स्वागत किया़ 1 मार्च की शाम 7 बजे यश मुंबई से हवाई जहाज से रात्रि 8.30 बजे नागपुर के हवाई अड्डे पर पहुंचा़ जहां उसे लेने के लिए पिता विनोद मोटवानी पहुंचे़ देर रात्रि यश सकुशल अपने घर लौटने से परिजनों ने राहत की सांस ली़ बुधवार की सुबह हिंगनघाट की उपविभागीय अधिकारी शिल्पा सोनाले, तहसीलदार व नप प्रशासन सतीश मसाल, नायब तहसीलदार समशेर खां पठान ने यश के घर पहुंचकर उसका स्वागत किया.
यूक्रेन के भीतरी क्षेत्र में कोई समस्या नहीं है़ किन्तु सीमा क्षेत्र में हालात काफी खराब है़ डेनप्रो, ओडेसा से लेकर रोमानिया की सीमा तक हमें वहां के नागरिक व प्रशासन का अच्छा सहयोग मिला़ खानपान की व्यवस्था की गई़ बार्डर क्रास करने के बाद इंडियन असेम्बली का भी पूरा सहयोग मिला़ घर पहुंचकर काफी अच्छा महसूस कर रहा हूं.
-यश विनोद मोटवानी, छात्र-हिंगनघाट.