वर्धा में गर्मी का रौद्र रूप: पारा 43.05 डिग्री के पार, प्रशासन ने जारी किया येलो अलर्ट; तपती सड़कों ने बढ़ाई

Wardha Heatwave News: वर्धा में भीषण गर्मी के चलते पारा 43.05 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है, वहीं सीमेंट की तपती सड़कों और पेड़ों की कमी से जनजीवन बेहाल है।
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Yellow Alert Wardha Heat Stroke Warning: वर्धा जिले में गर्मी ने अचानक तीव्र रूप धारण कर लिया है। पिछले कुछ दिनों तक आंशिक बादल और कहीं-कहीं हल्की बारिश के बाद अब मौसम पूरी तरह साफ हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। मंगलवार, 14 अप्रैल को अधिकतम तापमान 43.05 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

इससे पहले सोमवार को यह 43.01 डिग्री सेल्सियस था। तापमान में इस वृद्धि ने आम जनजीवन को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण सड़क पर आवाजाही कम हो गई है, जबकि लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। स्थिति ऐसी बन गई है मानो सूर्य तीव्रता से तप रहा हो।

प्रशासन की अपील और सावधानियां

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से दोपहर के समय घर से बाहर न निकलें। विशेष रूप से बुजुर्गों, बच्चों और बीमार व्यक्तियों की अतिरिक्त देखभाल करने की सलाह दी गई है। नागरिकों को अधिक पानी पीने, हल्के और सूती कपड़े पहनने तथा शरीर को ठंडा रखने के उपाय अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने मजदूरों, किसानों और निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों को भी चेतावनी दी है कि वे तेज धूप में काम करने से बचें और कार्य का समय सुबह या शाम के अपेक्षाकृत ठंडे समय में निर्धारित करें। पशुपालकों को अपने मवेशियों को छांव और ठंडे स्थानों पर रखने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग का येलो अलर्ट

नागपुर स्थित मौसम वेधशाला के अनुसार आगामी दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए जिले में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जो संभावित प्रतिकूल मौसम की चेतावनी है। प्रशासन ने नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।

सीमेंट-कंक्रीट सड़कों से बढ़ रही गर्मी

हाल के वर्षों में जिले में डामर सड़कों की जगह बड़े पैमाने पर सीमेंट-कंक्रीट सड़कों का निर्माण किया गया है। यह सड़कें अधिक गर्मी अवशोषित करती हैं, जिससे तापमान का प्रभाव और बढ़ जाता है। इसके अलावा सड़क चौड़ीकरण के दौरान पेड़ों की कटाई के बाद पर्याप्त वृक्षारोपण न होने से भी स्थिति और गंभीर हो गई है, जिससे शहरी क्षेत्रों में गर्मी का असर अधिक महसूस किया जा रहा है।

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