Wardha Wildlife: वर्धा के गिरड़-खुर्सापार जंगल में बाघिन TF-1 ने दिए 4 शावकों को जन्म

Wardha Tiger Conservation: वर्धा जिले के गिरड़-खुर्सापार वन क्षेत्र में बाघिन TF-1 ने दूसरी बार चार शावकों को जन्म दिया है। अब जंगल सफारी परियोजना को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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Tiger Cubs (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
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Girad Khursapar Forest: वर्धा जिले के समुद्रपुर तहसील के गिरड़-खुर्सापार वन क्षेत्र में बाघ संरक्षण को बड़ी सफलता मिली है। यहां प्रसिद्ध बाघिन टीएफ-1 ने दूसरी बार चार शावकों को जन्म दिया है। लगभग चार माह के ये शावक फिलहाल अपनी मां के साथ जंगल में विचरण कर रहे हैं।

इससे यह क्षेत्र एक बार फिर बाघों के सुरक्षित प्राकृतिक आवास के रूप में उभरकर सामने आया है। करीब दो वर्ष पहले भी टीएफ-1 ने चार शावकों को जन्म दिया था। हालांकि उस समय एक शावक सड़क पार करते समय दुर्घटना में मारा गया था। इसके बाद बाघिन ने शेष तीन शावकों का पालन-पोषण इसी क्षेत्र में किया और उन्हें शिकार करने का प्रशिक्षण भी दिया।

वर्धा के जंगल में गूंजी खुशखबरी

बड़े होने पर शावकों की आवाजाही खेतों तक बढ़ने से संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने दो शावकों को बेहोश कर पकड़कर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया था। उस समय यह आशंका जताई जा रही थी कि टीएफ-1 अपना क्षेत्र छोड़ देगी, लेकिन उसने गिरड़-खुर्सापार के जंगल को ही अपना स्थायी आवास बनाए रखा। अब दूसरी बार चार शावकों के जन्म ने इस क्षेत्र की जैव विविधता और संरक्षण क्षमता को और मजबूत साबित किया है।

जंगल सफारी परियोजना को मिलेगा बढ़ावा

क्षेत्र में बाघों की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए स्थानीय पर्यटन को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से गिरड-खुर्सापार जंगल सफारी परियोजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।

विधायक समीर कुष्णावार तथा वन विभाग की पहल पर जलस्रोतों का संरक्षण, घास के मैदानों का विकास, वन्यजीवों के सुरक्षित आवास, सुरक्षा व्यवस्था और आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। परियोजना शुरू होने के बाद पर्यटकों को जंगल सफारी का आकर्षक अनुभव मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध होंगे।

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