वर्धा: धाम परियोजना में जलस्तर घटकर 37% पर पहुंचा, जिले की पेयजल व्यवस्था पर बढ़ी चिंता

Wardha Dham Project Water Level Drop : वर्धा और 14 गांवों को पानी सप्लाई करने वाले धाम जलाशय में पानी घटकर 37% रह गया है। मानसून में देरी के कारण जलस्तर में लगातार गिरावट आ रही है।
Wardha Dam
वर्धा धाम प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Wardha Dham Project: वर्धा शहर सहित आसपास के 14 प्रमुख गांवों की प्यास बुझाने वाली महाकाली स्थित धाम परियोजना में पानी का स्टॉक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। वर्तमान में इस मुख्य जलाशय में केवल 37 प्रतिशत जल भंडारण ही शेष बचा है। आसमान से बरसती आग और लगातार घटते जलस्तर के कारण अब स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ सिंचाई विभाग और जिला प्रशासन की भी चिंताएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। यदि आने वाले कुछ दिनों में जोरदार बारिश नहीं हुई, तो पूरे इलाके को भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।

47.5 डिग्री सेल्सियस तापमान ने सोखा पानी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल और मई के महीने में वर्धा और उसके आसपास के क्षेत्रों में रिकॉर्ड तोड़ और भीषण गर्मी दर्ज की गई। इस दौरान पारा उछलकर 47.5 °C के डरावने स्तर तक पहुंच गया था। कई हफ्तों तक तापमान लगातार 46 °C के आसपास बना रहा, जिसके कारण धाम परियोजना के खुले जलाशय में जमा पानी का बहुत बड़े पैमाने पर वाष्पीकरण  हुआ। एक तरफ गर्मी के कारण पानी तेजी से भाप बनकर उड़ता रहा, तो दूसरी तरफ तपन से बेहाल नागरिकों के बीच पेयजल की मांग भी कई गुना बढ़ गई। इस दोहरी मार के कारण परियोजना के जल भंडार पर अतिरिक्त दबाव पड़ा और पानी तेजी से कम होता चला गया।

पिछले साल बेमौसम बारिश ने बचाया था

मौसम के मिजाज की तुलना करें तो पिछले वर्ष मई के महीने में हुई भारी बेमौसम बारिश के कारण जंगल और जलग्रहण क्षेत्रों में पर्याप्त पानी आ गया था। इसके चलते जलाशय के जलस्तर में अपेक्षाकृत काफी कम गिरावट दर्ज की गई थी और पानी जून के अंत तक के लिए सुरक्षित था। लेकिन इस वर्ष स्थिति बिल्कुल उलट रही; बेमौसम बारिश नहीं होने से अप्रैल से ही परियोजना से लगातार पानी की निकासी होती रही। मई के मध्य तक जहां इस बांध में लगभग 47 % जल भंडारण सुरक्षित था, वहीं पिछले तीन हफ्तों के भीतर यह 10 फीसदी और घटकर अब महज 37 % पर सिमट गया है।

7 जून बीतने के बाद भी मानसून गायब

आमतौर पर जून महीने के पहले हफ्ते में महाराष्ट्र के इन हिस्सों में मानसून की दस्तक हो जाती है और प्री-मानसून बौछारें शुरू हो जाती हैं। लेकिन इस साल मौसम के चक्र में आए भारी असंतुलन और अल-नीनो के प्रभावों के चलते 7 जून बीत जाने के बाद भी वर्धा में बारिश का दूर-दूर तक आगमन नहीं हुआ है।

मौसम वैज्ञानिकों और जल विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान मौसमी परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में भी बहुत अधिक या पर्याप्त वर्षा होने की संभावना काफी कम दिखाई दे रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जून के मध्य में बारिश शुरू हो भी जाती है, तो भी सूखे खेतों और जंगलों को पार कर जलाशय के जलस्तर में वास्तविक वृद्धि होने में अच्छा-खासा समय लगेगा।

ऐसे में धाम परियोजना के जलस्तर में रोजाना हो रही यह भारी गिरावट आने वाले दिनों में वर्धा और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एक बड़े संकट का संकेत दे रही है।

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