वर्धा में फसल का नुकसान (सौजन्य-नवभारत)
Wardha Farmers Compensation Issue: वर्धा जिले की महत्वपूर्ण धाम सिंचाई परियोजना से प्रभावित किसानों को इन दिनों गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। परियोजना की ऊंचाई लगभग 1.9 मीटर बढ़ाए जाने के कारण मासोद, खैरवाड़ा और ब्राम्हणवाड़ा गांवों के कई किसानों की कृषि भूमि पानी में डूब गई है।
इससे उनकी फसलें नष्ट हो गईं और आजीविका का प्रमुख साधन भी खत्म हो गया है। प्रभावित किसान मुआवजे की मांग को लेकर जलसंपदा विभाग के सिंचाई कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है।
जानकारी के अनुसार, वर्धा सिंचाई विभाग के कार्यालय में धाम परियोजना से संबंधित महत्वपूर्ण रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, जिससे प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई है। मामले में राजस्व विभाग और सिंचाई विभाग के बीच समन्वय की कमी भी सामने आई है। जमीन के सर्वे नंबरों में सुधार के दौरान दोनों विभागों के बीच तालमेल न होने से किसानों को आवश्यक दस्तावेज जुटाने में कठिनाई हो रही है।
किसानों से पुराने सातबारा और री-नंबरिंग दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा जा रहा है, जो कई मामलों में उपलब्ध नहीं हैं। मासोद गांव के अभिषेक त्रिवेदी, अजाब वाघधरे, गुण्या पुसनाके, नागो धुर्वे और जावेद मुस्तफा सहित कई किसानों ने बताया कि उनकी जमीन परियोजना में समाविष्ट होने के बावजूद अब तक उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है।
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इसी तरह ब्राम्हणवाड़ा और खैरवाड़ा के कई किसान भी इस समस्या से जूझ रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द रिकॉर्ड की स्थिति स्पष्ट कर मुआवजा प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके। इस ओर संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने गंभीरता से ध्यान देकर किसानों को राहत प्रदान करने की मांग है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि विभाग को स्वयं राजस्व विभाग से आवश्यक दस्तावेज प्राप्त कर प्रक्रिया को सरल बनाना चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों को शीघ्र मुआवजा मिल सके। वहीं, विभागीय रिकॉर्ड का अभाव प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
इस परियोजना के तहत कुल कितनी भूमि अधिग्रहित की गई और कितने किसान प्रभावित हुए, इसकी स्पष्ट जानकारी भी संबंधित विभाग के पास नहीं होने की बात सामने आई है। इससे प्रभावित परिवारों में असंतोष बढ़ रहा है।