वर्धा के जलाशयों में 62.52% पानी, फिर भी गर्मी में संकट की आशंका; मितव्ययी जल उपयोग जरूरी
Wardha Dams: वर्धा जिले के 11 जलाशयों में फिलहाल 62.52% उपयोगी जलसंग्रह है। फरवरी में जलस्तर गिरने से गर्मी में संकट की आशंका, प्रशासन ने मितव्ययी उपयोग की अपील की।
- Written By: अंकिता पटेल
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Wardha Drinking Water Crisis: वर्धा जिले में स्थित 11 बड़े और मध्यम जलाशयों में वर्तमान में 62.52 प्रतिशत उपयोगी जलसंग्रह उपलब्ध है। ये जलाशय जिले के नागरिकों की पेयजल जरूरतों के साथ-साथ सिंचाई और वन्यजीवों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
हालांकि फरवरी माह में ही जलस्तर में उल्लेखनीय गिरावट आने से आने वाले गर्मी के दिनों में जल संकट की आशंका का सावधानीपूर्वक और मितव्ययी उपयोग को देखते नागरिकों से उपलब्ध पानी करने की अपील की जा रही है।
महाकाली स्थित धाम परियोजना वर्धा शहर सहित आसपास के 13 गांवों की पेयजल जरूरतों को पूरा करती है। इसके अलावा बोर, निम्न वर्धा, पोथरा, पंचधारा, डोंगरगांव, मदन, मदन उन्नई, लाल नाला, वर्धा कर और सुकली लघु परियोजनाओं से भी जिले के विभिन्न गांवों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जाता है।
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किसानों के लिए हो रहा बांध का उपयोग
इन जलाशयों से सिंचाई के लिए भी पानी छोड़ा जाता है, जिससे किसान वर्ग को लाभ मिलता है। गर्मी के मौसम में मुख्य रूप से औद्योगिक और पेयजल प्रयोजनों के लिए ही पानी का उपयोग किया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, वर्ष 2019 में जिले को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ा था, तब धाम परियोजना के मृत जलसंग्रह से पानी उठाकर नागरिकों को आपूर्ति करनी पड़ी थी। इस वर्ष वैसी स्थिति बनने की संभावना कम बताई जा रही है, फिर भी एहतियात के तौर पर जल संरक्षण जरूरी है।
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प्रमुख जलाशयों में उपलब्ध जलसंग्रह
| क्रमांक | जलाशय / प्रकल्प का नाम | उपलब्ध जलसंग्रह (%) |
|---|---|---|
| 1 | बीर प्रकल्प | 65.78% |
| 2 | निम्न वर्षा | 72.61% |
| 3 | धाम प्रकल्प | 67.70% |
| 4 | पोथरा प्रकल्प | 42.87% |
| 5 | पंचधारा प्रकल्प | 59.20% |
| 6 | डोगरगांव प्रकल्प | 54.26% |
| 7 | मदन प्रकल्प | 65.90% |
| 8 | लात नाला प्रकल्प | 11.93% |
| 9 | सुकली लघु प्रकल्प | 56.54% |
