48 बोगस डॉक्टरों पर कसा शिकंजा; 10 के खिलाफ FIR, 7 अस्पताल किए सिल

fake-doctors should not be treated with treatment - CEO
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वर्धा. ग्रामीण क्षेत्र में बोगस डाक्टर बडी मात्रा में सक्रिय है़. कम पैसो में दवाई व स्वास्थ्य सुविधा मिलने से ग्रामीण भी इन डाक्टरों के बहकावे में आते है़. बिना किसी लाईसेन्स के अस्पताल चला कर यह डाक्टर जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड कर रहे है़. जिले में 2021-22 इस वर्ष में करिब 48 बोगस डाक्टरो पर स्वास्थ्य विभाग ने शिकंजा कसा है़. इनमें से 10 के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया गया़ जबकि 7 डाक्टरों के अस्पताल सील किये गये़ 

बता दे कि, जिले में कोरोना के संकट के बाद से बोगस डाक्टर अधिक सक्रिय हो गये है़. इस महामारी की चपेट में आनेवाले नागरिक गांव में ही बोगस डाक्टरो के पास जाकर दवाईया लेते थे़ साथ ही मौसमी बिमारियों का भी फायदा यह डाक्टर बडी मात्रा में उठाते है़. ग्रामीण क्षेत्र के नागरिक आर्थिक नुकसान व समय बचाने के लिये गांव के ही डाक्टरो को अपनी तबियत दिखाते है़.

इसी अवसर का लाभ कुछ बोगस डाक्टर उठाते नजर आ रहे है़. कोरोनाकाल में ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे डाक्टरो ने अपनी दूकादारी जमा ली थी़ नागरिकों के स्वास्थ्य से खिलवाड कर उनकी आर्थिक लूट कर रहे थे़ शहरी डाक्टरों की तूलना में कम फी व सस्ती दवाई मिलने से ग्रामीण भी ऐसे डाक्टरो की बातों में आ जाते है़. कोरोना के समय ऐसे डाक्टरों ने कई नागरिकों को लूटा है़. बिना कोई लाईसेन्स व प्रमाणपत्र के यह डाक्टर गांवखेडो में किराये के मकानो में अपना अस्पताल शुरु कर देते है़. तो कुछ डाक्टर फोनकॉल पर सेवा प्रदान करते है़. परंतु अधुरा ज्ञान व गंभीर बिमारी की समझ न होने से कई बार उनकी दवाई नागरिकों के लिए जानलेवा साबीत होती है़.

इस संबंध गत दस महिनो में कई शिकायते स्वास्थ्य प्रशासन को मिली थी़ इसके आधार पर जिले में 48 बोगस डाक्टरों पर कार्रवाई की गई है़. 10 के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया गया है़. इसमें आर्वी तहसील के 2, आष्टी के 2, देवली 3, सेलू 2 व समुद्रपुर तहसील के 1 डाक्टर का समावेश है़. वहीं 7 के अस्पताल सील कर दिये गये़ शेष डाक्टरो को नोटीस जारी की गई़ तो कुछ अपनी दूकानदारी बंद कर निकल जाने की जानकारी है़. 

जिला समिती ले रही एक्शन

बोगस डाक्टरों के संबंध में शिकायत मिलने पर जिलास्तरीय समिती एक्शन लेती है़. जिलाधिकारी, जिला स्वास्थ्य अधिकारी व जिला शल्य चिकित्सक की त्रीसदस्यीय समिती इसकी पुर्ण जांच कर संबंधीतों के खिलाफ कार्रवाई करती है़. शिकायत मिलते ही तहसीलस्तरीय समिती के माध्यम से संबंधीत डाक्टर व अस्पताल की संपुर्ण रिपोर्ट मांगी जाती है़. पश्चात कानूनी कार्रवाई की जाती है़. 

नागरिक बरते सतर्कता

जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्र के नागरिक बदलते मौसम में बिमारियों से ग्रस्त होते है़. साथ ही संक्रमक बिमारियां भी बिच बिच में पाव फैलाती है़. ऐसी स्थिति में लोग बोगड डाक्टरों के बहकावे में आते है़. कई बार गलत दवाई के सेवन से जान तक जाती है़. इस लिये नागरिक मान्यताप्राप्त चिकित्सकों के पास ही अपना ईलाज करवाए़ ऐसे बोगस डाक्टरो से बचे, ऐसा आहवान स्वास्थ्य विभाग ने किया है़. 

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