

वर्धा. इस ओर अधिकारी भी ध्यान नहीं देते. लेकिन अब कोरोना की पार्श्वभूमि पर अचानक नियम सख्त होने से अधिकारी व कर्मचारियों को पसीने छूट गए है. ऐसे समय में अब कर्मचारी तथा अधिकारी शासकीय विश्रामगृह तथा रिश्तेदारों के निवास का सहारा लेते दिखायी पड़ रहे है. जिले के अनेक अधिकारी व कर्मचारी मुख्यालय में न रहते हुए अपडाउन करना पसंद करते है. कोरोना वायरस का बढ़ता संक्रमण देखते हुए राज्य शासन ने मात्र 5 फीसदी कर्मचारियों की उपस्थिति पर ही काम करने के निर्देश दिए थे. सभी अधिकारी व कर्मचारियों को मुख्यालय में रहना अनिवार्य किया था.
लेकिन इस आदेश की ओर अनदेखी करते हुए अनेक अधिकारी व कर्मचारी मुख्यालय में न रहते हुए अपने-अपने गांव या जिले में वापस चले गए. अब ग्रीन जोन में होनेवाले जिलो में शासन ने लॉकडाउन में शिथिलता दी है. इससे शासकीय कर्मचारियों की संख्या कार्यालयों में बढ़ गई है. ऐसी स्थिति में सभी अधिकारी व कर्मचारियों को काम पर वापस आने के निर्देश दिए गए. परंतु मुख्यालय में न रहनेवाले अधिकारी व कर्मचारियों को इस आदेश से पसीने छूट गए. अनेक अधिकारी व कर्मचारी वापस तो लौटे, लेकिन रहने की समस्या प्रमुखता से सामने आयी. इस स्थिति में अब इन अधिकारी व कर्मचारियों ने विश्रामगृह में पनाह ली है. वहीं कुछ अधिकारी व कर्मचारी रिश्तेदारों के घर में दिन निकाल रहे है.
मुख्यालय में रहना अनिवार्य होकर भी बाहर जिले से आवागमन करनेवाले अधिकारी व कर्मचारियों के प्रति प्रशासन ने सख्त रवैय्या अपनाया है. इसके तहत ग्रामीण जलापूर्ति विभाग व निर्माण कार्य विभाग के दस कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस भेजा गया है. इससे कर्मचारियों में बवाल मचा हुआ है.
मुख्यालय में न रहते हुए अपडाउन करनेवाले कर्मचारियों को सबक सिखाने के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी डा़ सचिन ओम्बासे ने परिपत्रक निकाला है. इसके तहत इन अधिकारी व कर्मचारियों की जिम्मेदारी विभाग प्रमुखों को सौंपी गई है. मुख्यालय में न रहनेवालों की जांच करने तीन उड़न दस्ते तैयार है. अगर कोई अपडाउन करते मिलता है तो अनधिकृत गैरहाजिर समझकर बिना वेतन अवकाश लगाने के निर्देश दिए है.