वर्धा में 20 जून के बाद भी मानसून लापता: आसमान की बेरुखी से सूखा पड़ा 'अन्नदाता' का खेत, बुआई ठप

Wardha Monsoon Delay News: वर्धा जिले में 20 जून बीतने के बाद भी मानसून नहीं पहुंचा है। बारिश नहीं होने से खरीफ बुआई प्रभावित हुई है और किसान खेत तैयार कर आसमान की ओर उम्मीद लगाए बैठे हैं।
Monsoon remains missing in Wardha even after June 20; farmers' fields parched due to the sky's indifference, sowing operations stalled.
वर्धा, मानसून, किसान, खरीफ बुआई,प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
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Wardha Monsoon Kharif Sowing: वर्धा जून माह की 20 तारीख बीत चुकी है। लेकिन जिले में मानसून का अब तक कोई अता-पता नहीं है। हर वर्ष इस समय तक जिले के अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी बारिश हो जाती थी और खेतों में बुआई का कार्य भी गति पकड़ लेता था।

किंतु इस वर्ष आसमान की बेरुखी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। मेघों की राह देखते-देखते किसानों की आंखें पथरा गई हैं और खेत अब भी पहली अच्छी बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। जिला मुख्य रूप से कृषि प्रधान है।

जहां खरीफ सीजन में कपास, सोयाबीन और तुअर की बड़े पैमाने पर खेती की जाती है। सामान्यतः जून के दूसरे सप्ताह तक किसान बुआई की तैयारी पूरी कर लेते हैं और अच्छी वर्षा होने पर खेतों में हरियाली दिखाई देने लगती है।

लेकिन इस बार मानसून की धीमी चाल और बारिश की बेरुखी ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। कई किसानों ने बारिश की उम्मीद में खेतों की जुताई और अन्य तैयारियां पूरी कर ली हैं। बीज और खाद की व्यवस्था भी कर ली गई है।

बुआई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे किसान

पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण वे बुआई शुरू करने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं होती है। तो बुआई का समय निकलने का डर किसानों को सता रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में अब हर सुबह किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी रहती हैं। काले बादल आते हैं, लेकिन बिना बरसे ही लौट जाते हैं। इससे किसानों की बेचैनी और बढ़ती जा रही है।

अच्छी बारिश पर टिकी किसानों की उम्मीद

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी कुछ दिनों में अच्छी वर्षा हो जाती है तो स्थिति संभल सकती है। अन्यथा खरीफ सौजन पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। बारिश की बाट जोह रहे किसानों के मन में अब एक ही प्रार्थना है कि जल्द से जल्द मेघ बरसे और सूखे पड़े खेतों में फिर से हरियाली लौट आए। क्योंकि जिले के किसान जानते हैं कि जब मेघ मुस्कुराते हैं, तभी खेत लहलहाते हैं और किसानों के चेहरे खिल उठते हैं।

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