बेल्जियम में मंटो-प्रेमचंद का जादू, वर्धा यूनिवर्सिटी में लेओ वन बोले- हिंदी से खुलता है दुनिया का दरवाजा
MGAHV Wardha News: बेल्जियम के विद्वान लेओ वन ने वर्धा हिंदी विवि में कहा कि प्रेमचंद और मंटो का बेल्जियम में बड़ा प्रभाव है। हिंदी भाषा सीखने से वैश्विक संस्कृति के नए दरवाजे खुलते हैं।
- Written By: रूपम सिंह
बेल्जियम के विद्वान ने गिटार पर हिंदी गीत सुनाकर जीता छात्रों का दिल। (सौजन्य-नवभारत)
Wardha Mahatma Gandhi Hindi University News: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में घंट विश्वविद्यालय, बेल्जियम के लेओ वन क्लैननबूगल ने बेल्जियम में भारत की छवि विषय पर आयोजित व्याख्यान में कहा कि बेल्जियम में हिंदी के महान कहानीकार प्रेमचंद और मंटो का बड़ा प्रभाव है। भारत के लोंगो में आतिथ्य का जो भाव है उससे वे बड़े अभिभूत हुए उन्होंने विद्यार्थियों से बेल्जियम में हिंदी का प्रचार-प्रसार, हिंदी धारावाहिकों और फिल्मों का वैश्विक प्रभाव, जनसंचार माध्यमों की स्वतंत्रता आदि विषयों पर खुलकर चर्चा की।
लेओ वन घंट विश्वविद्यालय के इंडोलोजी विभाग में हिंदी पढ़ाते है और इनके विभाग में बेल्जियम और बेल्जियम में बसे भारत के विद्यार्थी हिंदी का अध्ययन करते हैं। अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने हिंदी के प्रति लगाव का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्हें दलाई लामा के व्याख्यान की एक कैसेट उनके मित्र ने भेंट की थी जिसके कारण वें हिंदी साहित्य व भारत की संस्कृति के प्रति आकर्षित हुए।
उन्होंने माना कि हिंदी पढ़ने से दुनिया का नया दरवाजा खुलता है। हिंदी साहित्य में शक्ति है, जिससे भाषा और संस्कृति का परिचय होता है। इस अवसर पर सहायक प्रोफेसर डॉ. रूपेश कुमार सिंह, डॉ. कोमल कुमार परदेशी, जनसंपर्क अधिकारी बी.एस. मिरगे सहित हिंदी साहित्य, जनसंचार, प्रदर्शनकारी कला, इतिहास, शिक्षा आदि विभागों के विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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भाषाओं की विविधता को सम्मान देने का आह्वान
लेओ वन ने भाषाओं की विविधता को सम्मान देने का आह्वान करते हुए हिंदी के भविष्य को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने गिटार पर हिंदी एवं जर्मनी का गीत भी सुनाया। ग़ालिब सभागार में बुधवार, 18 फरवरी को आयोजित व्याख्यान में साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो.अवधेश कुमार ने लेओ वन का परिचय कराया तथा भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर ने सूत माला एवं शॉल प्रदान कर उनका सम्मान किया।
