अजित पवार की मौत के कारण नहीं मिली सैलरी; हिंजेवाड़ी की IT कंपनी ने यह बहाना बनाकर सैंकड़ों कर्मचारियों को ठगा

IT Employee Salary Scam: पुणे में एक IT कंपनी के CEO की गिरफ्तारी से एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। कंपनी ने सैलरी न देने की वजह अजित पवार की विमान हादसे में मौत को बताया, जानें कैसे हुआ खुलासा?
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सांकेतिक फोटो (सोर्स: डिजाइन फोटो)
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Pune IT Firm Scam: पुणे के हिंजेवाड़ी स्थित आईटी कंपनी थिंक टेक इंडिया ओपीसी लिमिटेड में हुए एक बड़े धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले का पर्दाफाश हुआ है। इस घोटाले के मुख्य आरोपी और कंपनी के सीईओ, हर्षल ठाकरे, को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह फर्म नोएडा में पंजीकृत थी, जिसने कथित तौर पर महीनों तक कर्मचारियों के वेतन का भुगतान न करने के बाद अचानक अपना परिचालन बंद कर दिया।

धोखाधड़ी का तरीका और शिकार कर्मचारी

इस घोटाले का सबसे दुखद पहलू यह है कि इसके शिकार मुख्य रूप से वे नए इंजीनियरिंग फ्रेशर्स बने, जिन्हें पुणे, पिंपरी चिंचवड़ और अन्य शहरों के कॉलेजों में कैंपस प्लेसमेंट के माध्यम से भर्ती किया गया था। लातूर की एक महिला कर्मचारी ने बताया कि पिछले सितंबर में चयन के बावजूद उसे एक बार भी वेतन नहीं मिला। इतना ही नहीं, जो कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर रहे थे, उनसे कंपनी ने लैपटॉप के नाम पर 15,000 रुपये की राशि भी जमा करवा ली।

अजित पवार की विमान दुर्घटना का अजीब झांसा

वेतन न देने के लिए प्रबंधन ने कर्मचारियों को कई तरह के भ्रामक कारण बताए। इनमें सबसे चौंकाने वाला दावा यह था कि वेतन प्रक्रिया इसलिए रुकी हुई है क्योंकि एक महत्वपूर्ण फाइल वित्त विभाग में अटकी हुई है। इसका कारण उन्होंने यह बताया कि तत्कालीन वित्त मंत्री व पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई है। यह घटना 28 जनवरी को हुई थी। अर्थात अजित पवार के मृत्यु का कारण बताकर कर्मचारियों का झांसा दिया गया। इसके अलावा, पेंडिंग ऑडिट और विदेशों से फंड आने में देरी जैसे बहाने भी बनाए गए।

विक्रताओं और मकान मालिकों को भी दिया धोखा

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी ने केवल कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि विक्रेताओं और मकान मालिकों को भी धोखा दिया। कंपनी ने लगभग 300 लैपटॉप 2,000 रुपये प्रति माह के किराए पर लिए थे, लेकिन उनका भुगतान नहीं किया गया। इसी तरह, कार्यालय परिसर के मालिक का किराया भी बकाया था।

वर्तमान में, हिंजेवाड़ी पुलिस मामले की जांच कर रही है और बड़ी संख्या में पूर्व कर्मचारी अपने बकाया वेतन और जमा की गई राशि की वसूली के लिए पुलिस स्टेशन में इकट्ठा हुए हैं। यह मामला कॉर्पोरेट क्षेत्र में युवाओं के साथ होने वाले शोषण और फर्जीवाड़े का एक गंभीर उदाहरण पेश करता है।

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