मीरा-भाईंदर में करुणा का अनोखा कदम, महाराष्ट्र का पहला पालतू प्राणी गैस शवदाह गृह शुरू

Thane News: मीरा-भाईंदर में राज्य का पहला पालतू प्राणी गैस शवदाह गृह शुरू किया गया है, जो एलपीजी और प्राकृतिक गैस से स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल अंतिम संस्कार सुनिश्चित करता है।
प्रताप सरनाईक, पालतू गैस श्मशान (pic credit; social media)
प्रताप सरनाईक, पालतू गैस श्मशान (pic credit; social media)
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Mira-Bhayander Animal Gas Crematorium: मीरा-भाईंदर में पालतू और घरेलू जानवरों के लिए राज्य का पहला गैस शवदाह गृह शुरू किया गया है। यह पहल महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक की संकल्पना और प्रयास से संभव हुई है। नवघर गांव में बने इस शवदाह गृह का उद्घाटन सोमवार को हुआ, जबकि काशीमीरा में भी जल्द ही इसकी शुरुआत होगी।

इस नई सुविधा में एलपीजी और प्राकृतिक गैस का उपयोग करके पालतू प्राणियों के अंतिम संस्कार किए जाएंगे। इससे लकड़ी जलाने से होने वाला धुआं और प्रदूषण समाप्त होगा और दाह संस्कार पूरी तरह स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल होगा। इससे पहले मृत पालतू जानवर और पक्षी अक्सर खुले में फेंक दिए जाते थे, जिससे बदबू, संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बना रहता था। अब मासूम जीवों को सम्मानजनक अंतिम संस्कार मिलेगा।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उद्घाटन के अवसर पर कहा कि समाज की पहचान केवल इंसानों के प्रति नहीं, बल्कि हर जीव के प्रति हमारी संवेदनशीलता और करुणा में निहित है। उन्होंने कहा कि मीरा-भाईंदर में यह पहल न केवल स्वच्छता और स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह पशु-प्रेम और करुणा की मिसाल भी कायम करेगी।

कार्यक्रम में डॉ. नरेंद्र गुप्ता, भरत लाल अग्रवाल, रामस्वरूप टीबडेवाल, चेतन दवे, संतोष कुचेरिया, हेमलता सिंह, जारा मबैट, सरोज बोरसिया, अन्नू पाटिल और अन्य गणमान्य उपस्थित थे। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि अब तक मृत पशु-पक्षियों को खुले में फेंक दिया जाता था, जिससे संक्रमण और बीमारी का खतरा रहता था।

इस नई सुविधा से न केवल मासूम जीवों को सम्मानजनक विदाई मिलेगी, बल्कि शहर में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण भी बढ़ेगा। समिति ने कहा कि यह शवदाह गृह करुणा और संवेदनशीलता का प्रतीक है और पूरे राज्य के लिए मॉडल सुविधा बन सकता है।

मीरा-भाईंदर में इस पहल से नागरिकों में भी पशु-प्रेम और जिम्मेदार नागरिक होने की भावना बढ़ेगी। यह कदम दिखाता है कि मानवता और करुणा केवल शब्दों तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि समाज में वास्तविक क्रियान्वयन के माध्यम से हर जीव को सम्मान देना जरूरी है।

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