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उल्हासनगर के 25 गुंठा जमीन विवाद में नंद रामचंद जेठानी की अग्रिम जमानत याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में 26 अक्टूबर को सुनवाई नहीं हो सकी।
न्यायमूर्ति प्रफुल्ल एस. खुबलकर की अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर 2026 के लिए निर्धारित की।
शिकायतकर्ता अनिल आहूजा ने आरोप लगाया है कि पुराने पावर ऑफ अटॉर्नी दस्तावेज का कथित दुरुपयोग कर जमीन की नाप-तौल और कब्जे की कोशिश की गई।
Ulhasnagar Land Fraud Case: उल्हासनगर के शांति नगर स्थित 25 गुंठा जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में नंद रामचंद जेठानी की अग्रिम जमानत याचिका पर सोमवार, 26 अक्टूबर को बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। न्यायमूर्ति प्रफुल्ल एस. खुबलकर की अदालत ने समय की कमी के कारण मामले को 26 नवंबर 2026 तक के लिए आगे बढ़ा दिया यानी टाल दिया हैं ।
अदालत के आदेश के अनुसार यदि मामले में पहले अंतरिम राहत या गिरफ्तारी से संरक्षण दिया गया था, तो वह अगली सुनवाई की तारीख तक जारी रहेगा।
यह मामला सर्वे नंबर 171/क की 25 गुंठा जमीन से जुड़ा है। शिकायतकर्ता अनिल आहूजा ने आरोप लगाया है कि धीरज जेठानी, नंद रामचंद जेठानी और जगेश रघुनाथ गायकर ने वर्ष 2001 में जारी पावर ऑफ अटॉर्नी का कथित दुरुपयोग कर जमीन की नाप तौल करवाने और संपत्ति पर कब्जा करने की कोशिश की। शिकायत के मुताबिक पावर ऑफ अटॉर्नी देने वालों की मृत्यु के बाद भी दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया और संबंधित अधिकारियों को गुमराह किया गया ऐसा आरोप हैं और मामले में न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
शिकायतकर्ता के अनुसार नगर भूमापन कार्यालय उल्हासनगर-5 की रिपोर्ट और पत्राचार की जांच के बाद 12 मई 2026 को संबंधित सर्वे कार्यवाही और उससे जुड़े नक्शे को रद्द करने का आदेश दिया गया था। इसी प्रकरण में नंद जेठानी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। सोमवार को सुनवाई टलने के बाद अब इस मामले पर आगामी 26 नवंबर को आगे की सुनवाई और उसके बाद कानूनी कार्यवाही होगी।