Ulhasnagar: तीन बार विधायक, महापौर भी रहे, फिर भी मूलभूत सुविधाओं को तरसता उल्हासनगर

Maharashtra News:उल्हासनगर में आगामी मनपा चुनाव से पहले भाजपा विधायक कुमार आयलानी के लंबे राजनीतिक कार्यकाल के बावजूद शहर में मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
Kumar Ailani And Meena Ailani
कुमार आयलानी और मीना आयलानी (सौ. सोशल मीडिया )
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Maharashtra Local Body Election: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों की पृष्ठभूमि में उल्हासनगर महानगरपालिका को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

शहर के जानकार और बुद्धिजीवी वर्ग का कहना है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद उल्हासनगर आज भी बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है।

भाजपा विधायक कुमार आयलानी और उनका परिवार पिछले कई वर्षों से उल्हासनगर की राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाता रहा है। कुमार आयलानी पहले उपमहापौर रहे, जबकि उनकी पत्नी मीना कुमार आयलानी उल्हासनगर महानगरपालिका की महापौर रह चुकी हैं। इसके अलावा कुमार आयलानी तीन बार उल्हासनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक भी चुने गए।

कांग्रेस से भाजपा तक का सफर

कुमार आयलानी और उनकी पत्नी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से नगरसेवक और नगरसेविका के रूप में की थी। बाद में दोनों ने भाजपा का दामन थाम लिया। मतदाताओं ने उन्हें इस उम्मीद के साथ विधानसभा भेजा था कि शहर का समग्र विकास होगा और नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं मिलेंगी।

आज भी बुनियादी समस्याएं बरकरार

स्थानीय लोगों का कहना है कि उल्हासनगर में आज भी शुद्ध पेयजल की समस्या गंभीर बनी हुई है। संकरी और जर्जर सड़कें, अव्यवस्थित गलियां, कमजोर साफ-सफाई व्यवस्था और अवैध निर्माणों के कारण शहर की छवि प्रभावित हो रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति ऐसी है कि बेहतर इलाज और पढ़ाई के लिए नागरिकों को दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है।

विकासशील नियोजन की कमी का आरोप

शहर के जानकारों का आरोप है कि इतने लंबे राजनीतिक अनुभव के बावजूद विकास को लेकर कोई ठोस और दूरदर्शी योजना सामने नहीं आई। उनका कहना है कि कालानी परिवार के बाद यदि किसी विधायक को सबसे लंबा समय सत्ता में मिला, तो वह कुमार आयलानी हैं, लेकिन इसके अनुरूप विकास दिखाई नहीं देता।

मनपा चुनाव में जनता का फैसला अहम

अब जबकि उल्हासनगर महानगरपालिका चुनाव नजदीक हैं, सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शहर की जनता एक बार फिर पुराने नेतृत्व पर भरोसा करेगी या विकास और बदलाव के नाम पर नया विकल्प चुनेगी। आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि उल्हासनगर की सत्ता किसके हाथों में जाएगी।

उल्हासनगर से नवभारत लाइव के लिए अशोक वर्मा की रिपोर्ट

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