उपमुख्यमंत्री शिंदे के जिले में 73 करोड़ का घोटाला! 27 सरकारी योजनाएं डकार गए जालसाज, हुए चौंकाने वाले खुलासे

Thane 73 Crore Scam: ठाणे महिला व बालविकास विभाग में 73 करोड़ रुपए के बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। 27 योजनाएं सिर्फ कागजों पर चलीं, जबकि करोड़ों का भुगतान चहेती संस्थाओं को कर दिया गया।
Thane 73 Crore Scam News
प्रतीकात्मक तस्वीर (साेर्स: AI)
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Thane 73 Crore Scam News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गृह जिले ठाणे के महिला व बालविकास विभाग में 27 योजनाओं के नाम पर करीब 73 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आया है। आरोप है कि इन योजनाओं में से अधिकतर या तो अधूरी रहीं या केवल कागजों पर ही संचालित दिखाई गईं। सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं।

ठाणे जिले के कल्याण तालुका स्थित जांभूल गांव में कृषि तकनीकी केंद्र और कृषि पर्यटन केंद्र जैसी योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च दिखाए जाने का दावा किया गया, जबकि मौके पर इन परियोजनाओं का वास्तविक स्वरूप बेहद कमजोर और अधूरा पाया गया।

इसी तरह ठाणे जिले की भिवंडी तहसील के चिंबीपाड़ा में काथ्या उद्योग और शहापुर तहसील के दोर्याचा पाड़ा में दाल मिल परियोजना का भी यही हाल सामने आया। दाल मिल परियोजना तो कथित तौर पर 'गायब' पाई गई, जिससे स्थानीय स्तर पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं।

ठाणे के बाहर कागजों में चल रही थी योजनाएं

SIT जांच में यह भी सामने आया है कि कई योजनाएं ठाणे जिले की सीमा से बाहर रायगढ़ और मुंबई जिलों में दर्शाकर क्रियान्वित दिखाई गईं। शिलाई मशीन वितरण योजना में निजी संस्थाओं द्वारा किए गए कार्यों के फोटो फाइलों में लगाए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।

SIT जांच में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा

एसआईटी जांच में निविदा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। कई मामलों में निविदा और कार्यादेश की तिथियों में असंगति पाई गई है, जबकि कुछ मामलों में बिल पहले और निविदा बाद में जारी किए जाने के उदाहरण भी सामने आए हैं।

27 योजनाओं का ठेका केवल 3 संस्थाओं को ही दिया

सबसे गंभीर आरोप यह है कि वर्ष 2019 से 2025 के बीच निकाली गई 27 योजनाओं का ठेका केवल तीन संस्थाओं को ही दिया गया, जिन्हें कुल मिलाकर लगभग 73 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। बताया जा रहा है कि ये तीनों संस्थाएं एक ही स्थान से संचालित थीं। मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे हैं। जांच एजेंसियां अब पूरे प्रकरण की गहन पड़ताल में जुटी हैं।

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