महाराष्ट्र सरकार और BISAG-N के बीच ऐतिहासिक MoU, अब सैटेलाइट से होगी योजनाओं की निगरानी!

Maharashtra Geospatial Technology: महाराष्ट्र में विकास को नई गति देने के लिए CM फडणवीस की उपस्थिति में 'मित्रा' और BISAG-N के बीच समझौता हुआ। जानिए क्या है इसका उद्देश्य।
Maharashtra Govt BISAG-N MoU
महाराष्ट्र सरकार और BISAG-N के बीच MoU पर हुए हस्ताक्षण (सोर्स: सोाश्ल मीडिया)
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Maharashtra Govt BISAG-N MoU: महाराष्ट्र में शासन और बुनियादी ढांचे के विकास को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस की अध्यक्षता में राज्य सरकार की नीतिगत संस्था 'मित्रा' (Maharashtra Institution for Transformation) और BISAG-N (Bhaskaracharya National Institute for Space Applications and Geo-informatics) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य राज्य में जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी (Geospatial Technology) के उपयोग को बढ़ावा देना है। इस तकनीक के जरिए महाराष्ट्र सरकार अब अपनी नीतियों और मानक प्रक्रियाओं (SOPs) को अधिक वैज्ञानिक और डेटा-आधारित बनाने में सक्षम होगी।

विकास को मिलेगी नई दिशा

इस सहयोग के माध्यम से राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development), सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन और पर्यावरण प्रबंधन में क्रांतिकारी बदलाव आने की उम्मीद है। जियोस्पेशियल डेटा के उपयोग से सड़कों, पुलों और सिंचाई परियोजनाओं की योजना बनाना और उन्हें समय पर पूरा करना आसान हो जाएगा।

सटीक मॉनिटरिंग और सोशल इम्पैक्ट

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बात पर जोर दिया कि यह तकनीक सरकारी कार्यक्रमों की निगरानी और मूल्यांकन को बेहतर बनाएगी। अब सरकार न केवल योजनाओं के वित्तीय प्रदर्शन का आकलन कर सकेगी, बल्कि उनके वास्तविक परिणामों और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को भी सटीक रूप से माप सकेगी। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

ये लोग रहे उपस्थिति

मुंबई के सह्याद्री गेस्ट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में विधायक दिलीप वलसे पाटिल, विधायक राजेश क्षीरसागर, 'मित्रा' के सीईओ प्रवीण परदेशी, और BISAG-N के महानिदेशक टी. पी. सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह गठबंधन महाराष्ट्र को एक 'डिजिटल और स्मार्ट स्टेट' बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, जहां विकास की हर ईंट डेटा और तकनीक के आधार पर रखी जाएगी।

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