संपत्ति विवाद में भाई ने की भाई की हत्या, ठाणे की कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा
Thane Murder Case News: महाराष्ट्र के ठाणे शहर में एक ऑटो-रिक्शा चालक को उसके भाई की मौत के मामले में गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया। कोर्ट ने दोषी को 5 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Thane News: महाराष्ट्र के ठाणे शहर में संपत्ति विवाद में एक ऑटो-रिक्शा चालक को को 5 साल की सजा सुनाई है। कोर्ट ने ऑटो-रिक्शा चालक को उसके भाई की मौत के मामले में गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराया और और यह सजा सुनाई है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी पर लगाया गया एक लाख रुपये का जुर्माना मृतक के निकटतम वैध उत्तराधिकारी को दिया जाए। उत्तराधिकारी उचित सत्यापन किया जाए और राशि प्रदान की जाए।
ठाणे के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एस. बी. अग्रवाल ने 25 जुलाई को दिए गए आदेश में आरोपी महेंद्र सदाशिव करडक (59) पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। आदेश की प्रति सोमवार को उपलब्ध कराई गई।
2021 में हुई थी हत्या?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 6 जनवरी 2021 को ठाणे के वागले एस्टेट क्षेत्र में संपत्ति विवाद को लेकर हुए झगड़े में महेंद्र करडक ने अपने भाई आनंद करडक पर रसोई घर में इस्तेमाल किए जाने वाले चाकू से हमला कर दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना में उसने अपने एक अन्य भाई की पत्नी को भी घायल कर दिया था।
सम्बंधित ख़बरें
मानसून से पहले ठाणे में ड्रेन सफाई तेज करने के आदेश, निचले इलाकों में लगाए जाएंगे 102 पंप
ठाणे की 193 एकड़ जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 2800 करोड़ रुपये के TDR पर बढ़ा सियासी घमासान
‘हम मराठी को किराए पर घर नहीं देते’, भायंदर की घटना पर भड़के प्रताप सरनाईक, बोले-शिवसेना की भाषा में देंगे जवाब
कल्याण-डोंबिवली में कचरा फैलाने वालों पर कार्रवाई तेज, महापालिका ने बढ़ाई सख्ती
सुनवाई के दौरान, आरोपी के वकील ने दलील दी कि महेंद्र ने आत्मरक्षा में यह कदम उठाया। न्यायाधीश ने कहा कि मामले के तथ्यों से स्पष्ट है कि आरोपी ने स्वयं चाकू लेकर हमला किया। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी अचानक उत्तेजना में आत्म-नियंत्रण खो बैठा था और इसी कारण उसने हमला कर दिया।
यह भी पढ़ें:- गजब! बीयर बार में सरकारी फाइलों पर हो रहे साइन, नागपुर का VIDEO हुआ वायरल
अचानक हुए झगड़े के कारण हुई हत्या
न्यायालय ने कहा यह घटना पूर्व-नियोजित नहीं थी, बल्कि अचानक हुए झगड़े के दौरान गुस्से में हुई थी। अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपी का हत्या करने का कोई पूर्व इरादा नहीं था, लेकिन हमले के समय वह यह जानता था कि इससे मौत हो सकती है इसलिए आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराने के बजाय धारा 304 भाग दो (गैर-इरादतन हत्या) के तहत दोषी ठहराया जाता है।
वहीं अदालत ने आरोपी को धारा 307 के आरोप से बरी कर दिया गया, जो कि उसकी भाभी पर हमले को लेकर लगाया गया था। कोर्ट ने कहा कि मामले के पूरे घटनाक्रम को देखते हुए इसे नकारा नहीं जा सकता कि आरोपी को अधिक गंभीर रूप से फंसाने का प्रयास किया गया होगा इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी के खिलाफ धारा 307 के तहत मामला संदेह से परे सिद्ध हुआ है।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
