Maharashtra Government Maha Metro Rail Corporation: ठाणे की 28.8 किमी लंबी रिंग मेट्रो को गति देने के लिए राज्य सरकार ने वित्तीय सहारा दिया है। महाराष्ट्र मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड को परियोजना के लिए 24 करोड़ रुपए का ब्याजमुक्त अधीनस्थ कर्ज दो दिन पहले ही मंजूर किया गया है।
इस नई मंजूरी के साथ ठाणे रिंग मेट्रो के लिए राज्य सरकार की ओर से अब तक 74 करोड़ रुपए के कर्ज की मंजूरी हो चुकी है, जबकि परियोजना के लिए कुल 969.75 करोड़ रुपए के ब्याजमुक्त सेकेंडरी लोन का प्रावधान है। सरकार के इस फैसले से ठाणे शहर की प्रस्तावित सर्कुलर मेट्रो को वित्तीय मजबूती मिलेगी और परियोजना के क्रियान्वयन को रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
कर्ज पर फिलहाल ब्याज का प्रावधान नहीं है। भविष्य में जरूरत पड़ने पर वित्त विभाग की सहमति से ब्याज दर और वसूली तय होगी। कर्ज के लिए मोरेटोरियम अवधि भी तय नहीं है।
कनेक्टिविटी होगी मजबूतः मेट्रो से ठाणे के प्रमुख इलाकों के बीच तेज और सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी, यात्रियों को ठाणे स्टेशन या अन्य इंटरचेंज तक जाने की जरूरत कम होगी। ठाणे जंक्शन से शुरू होकर वहीं समाप्त होने वाली यह मेट्रो लाइन मेट्रो लाइन-4 और लाइन-5 से जुड़ेगी, जिससे मुंबई, भिवंडी और कल्याण तक सीधी यात्रा संभव होगी, बस और सड़क परिवहन पर दबाव भी घटेगा।
मेट्रो से काम, शिक्षा और कारोबार के लिए रोजाना सफर करने वालों का समय बचेगा। निजी वाहनों पर निर्भरता घटने से ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी।
मौजूदा और प्रस्तावित कॉरिडोर से जुड़कर ठाणे का सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क और मजबूत होगा।
प्रमुख स्टेशनः ठाणे जजंक्शन, वागले स्टेट सर्कल, मानपाड़ा, बालकुम, कोलशेत, साकेत, कापूरबाड़ी, डोंगरीपाड़ा, हीरानंदानी ईस्टेट, वाघचिल, विजय नगरी, नौपाड़ा, वॉटरफ्रंट, काशीनाथ घाणेकर नाट्यगृह
महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग ने हाल ही में जारी जीआर में यह मंजूरी दी है। ठाणे मनपा के माध्यम से प्रस्तावित इस परियोजना को केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद आगे बढ़ाया जा रहा है। परियोजना की मूल अनुमानित लागत 12,200.10 करोड़ रुपए थी।
केंद्र ने 4 सितंबर 2024 के पत्र के जरिए वित्तीय प्रारूप के साथ परियोजना के क्रियान्वयन को मंजूरी दी थी। राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के आधार पर परियोजना की संशोधित लागत और वित्तीय प्रारूप को भी मंजूरी दी गई। मंजूर वित्तीय प्रारूप के अनुसार परियोजना पर केंद्रीय कर के 50% हिस्से के लिए 354.11 करोड़ और राज्य स्तरीय कर के लिए 615.64 करोड़ रुपए का प्रावधान है।
कुल 969.75 करोड़ रुपए का ब्याजमुक्त अधीनस्थ कर्ज राज्य सरकार को महामेट्रों को उपलब्ध कराना है। इसी व्यवस्था के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में 60 करोड़ रुप का बजटीय प्रावधान किया गया है, जिसमें से अब 24 करोड़ रुपए जारी किए जा रहे हैं। जीआर के मुताबिक यह 24 करोड़ बिना शर्त ब्याजमुक्त कर्ज के रूप में दिए जाएंगे।