आरोप: कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता ने चुनाव आयोग पर साधा निशाना, मुंब्रा में मिला वोट चोरी का सबूत

Allegation: गणेशोत्सव के दौरान मुंब्रा नदी के तट पर सफाई के दौरान कर्मचारियों को एक बैग में मतदाता पहचान पत्र और पैन कार्ड मिले सूचना मिलते ही कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष नीलेश पाटिल घाट इलाके पहुंचे।
मुंब्रा में मिला वोट चोरी का सबूत
मुंब्रा में मिला वोट चोरी का सबूत (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Thane News: गणेशोत्सव के दौरान मुंब्रा नदी के तट पर सफाई के दौरान कर्मचारियों को एक बैग में मतदाता पहचान पत्र और पैन कार्ड मिले, इसकी सूचना मिलते ही कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष नीलेश पाटिल गणेश घाट इलाके में पहुंचे। उन्होंने संबंधित दस्तावेजों की तस्वीरें और वीडियो लिए और जब उन्होंने इनमें से कुछ मतदाता पहचान पत्रों पर दिए गए पते के बारे में पूछताछ की, तो पता चला कि वहां कोई रहता ही नहीं था।

इसलिए यह पता चला कि ये पहचान पत्र फर्जी थे। ठाणे कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने ये कार्ड 149 विधानसभा क्षेत्र के मतदाता पंजीकरण अधिकारी संदीप थोरात को सौंपे। इस अवसर पर ठाणे कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता राहुल पिंगले ने अपना रोष व्यक्त किया और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, कि सांसद राहुल गांधी पिछले कई सालों से सबूतों के साथ कह रहे हैं कि वोट चोरी के लिए फर्जी मतदाता पंजीकरण किया जा रहा है, लेकिन चुनाव आयोग लगातार आंखें मूंदकर सरकार का साथ दे रहा है।

मामलों की गहन जांच होनी चाहिए

पिंगले ने आगे कहा कि  ठाणे की यह घटना इसका ठोस सबूत है। ये फर्जी पहचान पत्र कैसे बनाए गए? इसके लिए कौन से आधार कार्ड, निवासी प्रमाण पत्र और मोबाइल नंबर जमा किए गए? किस साइबर कैफे या आधार सेतु के जरिए यह पंजीकरण किया गया? किस चुनाव में इसका इस्तेमाल हुआ? इन सभी मामलों की गहन जांच होनी चाहिए।

जांच कराने की मांग

राहुल पिंगले ने कहा कि यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, वर्ना लोकतंत्र सिर्फ नाम का रह जाएगा। इस प्रतिनिधिमंडल में नीलेश पाटिल, मोतीराम भगत, वसीम सैयद, यासीन मोमिन, रवींद कोली, नूरशीद शेख, हामिद शेख, रमेश सोनवणे, रोशन पाटिल और अन्य पदाधिकारी मौजूद थे। कांग्रेस ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही की मांग की है।

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लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा

ठाणे के कांग्रेस प्रवक्ता राहुल पिंगले ने कहा कि परब नाम का एक व्यक्ति पिछले 20 नगर स्लम, कलवा के पते पर रह रहा है, हालांकि मिले काडां पर पता एक ही प्रतीत होता है। इसलिए सभी कार्डों की प्रामाणिकता की जांच जरूरी है। जमा किए गए ज्यादातर पहचान पत्र 2015 के हैं, कुछ 2014, 2016 और 2017 के है। यह घोटाला सिर्फ मतदाता पंजीकरण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसी साजिश है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा है।

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