फायर ब्रिगेड से कराई जा रही सफाई! MBMC कर रहा है 2007 के शासन आदेश की अवहेलना

Mira Bhayander Fire Brigade: मीरा-भाईंदर में फायर ब्रिगेड से सड़क सफाई कराए जाने पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि यह 2007 के शासन आदेश का उल्लंघन माना जा रहा है।
Maharashtra government order 2007
Mira Bhayander fire brigade (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Mira Bhayander Municipal Corporation: आपातकालीन सेवा मानी जाने वाली फायर ब्रिगेड से यदि सड़क धुलाई और सफाई का काम कराया जाए तो क्या होगा? यही सवाल इस समय मीरा-भाईंदर शहर में गूंज रहा है। मीरा-भाईंदर मनपा क्षेत्र में फायर ब्रिगेड के जवानों और वाहनों का उपयोग सफाई कार्य के लिए किया जा रहा है, जिसे महाराष्ट्र शासन के 17 अप्रैल 2007 के स्पष्ट आदेश के विपरीत माना जा रहा है।

शासन का स्पष्ट आदेश क्या कहता है?

नगर विकास विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि दमकल सेवा एक “आपातकालीन सेवा” है। अग्निशमन वाहनों का उपयोग केवल आग बुझाने, बचाव कार्य और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों के लिए ही किया जाना चाहिए। सड़क धुलाई, साफ-सफाई या जल आपूर्ति जैसे कार्यों के लिए इनका उपयोग करना दुरुपयोग की श्रेणी में आता है।

बड़ा सवाल: कहीं आग लगी तो जिम्मेदार कौन?

शहर में यदि उसी समय कहीं भीषण आग लग जाए और फायर ब्रिगेड के वाहन सफाई कार्य में व्यस्त हों, तो क्या समय पर राहत पहुंच पाएगी? क्या जान-माल का नुकसान नहीं होगा? क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार है? मनपा की नियमित सफाई व्यवस्था कमजोर होने का खामियाजा क्या अब फायर ब्रिगेड को भुगतना पड़ेगा? इस तरह के कई सवाल शहर में उठाए जा रहे हैं।

फायर ब्रिगेड से कराई जा रही सफाई!

आयुक्त से जवाब की मांग

  • शहरवासियों और सामाजिक संगठनों ने मनपा प्रशासन से स्पष्ट जवाब मांगा है कि:
  • क्या फायर ब्रिगेड से सफाई कार्य कराना 2007 के शासन निर्णय का उल्लंघन नहीं है?
  • यदि शासन आदेश की अनदेखी की जा रही है, तो जिम्मेदार कौन है?
  • आपात स्थिति में फायर वाहनों की उपलब्धता कैसे सुनिश्चित की जा रही है?

जनता की सुरक्षा बनाम प्रशासनिक लापरवाही?

फायर ब्रिगेड कोई वैकल्पिक श्रम बल नहीं, बल्कि जीवन रक्षक आपातकालीन सेवा है। यदि शासन के स्पष्ट आदेश के बावजूद इसका उपयोग अन्य कार्यों में किया जा रहा है, तो यह न केवल प्रशासनिक लापरवाही, बल्कि जनता की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी माना जाएगा। सत्यकाम फाउंडेशन के एडवोकेट कृष्णा गुप्ता ने इस मामले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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