ठाणे में 3 MBMC Schools के विलय पर विवाद, शिक्षा प्रभावित होने की आशंका, MNS और विशेषज्ञों ने जताई चिंता
Mira Bhayandar MBMC Schools Merger: कम नामांकन वाले 3 स्कूलों के विलय के फैसले पर शिक्षा विशेषज्ञों और मनसे ने विरोध किया, कहा कि इससे गरीब बच्चों की पढ़ाई और स्कूल तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
मीरा-भाईंदर मनपा (सोर्सः फाइल फोटो)
MNS Opposes MBMC Schools Merger In Mira Bhayandar: ठाणे जिले के मीरा- भाईंदर में मनपा (एमबीएमसी) ने कम नामांकन वाले तीन विद्यालयों उत्तन, रेतीबंदर और बंदरवाड़ी को अन्य मनपा स्कूलों के साथ मिलाने (विलय) का निर्णय लिया है। इस फैसले को लेकर शिक्षा विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
मीरा- भाईंदर में मराठी, हिंदी, उर्दू और गुजराती माध्यम के कुल 36 मनपा विद्यालय संचालित हैं, जिनमें 8 हजार से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। कम छात्र संख्या के कारण इन तीन विद्यालयों के विद्यार्थियों को अन्य मनपा स्कूलों में स्थानांतरित करने की योजना बनाई गई है।
बच्चों को दूर के स्कूलों में भेजना मतलब खतरा मोल लेना
इस प्रक्रिया में मराठी, हिंदी और गुजराती माध्यम के विद्यालय शामिल हैं। मनपा प्रशासन इस निर्णय को चालू शैक्षणिक वर्ष से लागू करने की तैयारी में है। प्रशासन का दावा है कि समूहीकरण से छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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हालांकि, शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत श्रद्धा नारकर ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कहा कि छोटे बच्चों को दूर स्थित स्कूलों में भेजना कई अभिभावकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को दूरी के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है और इससे कुछ बच्चों के शिक्षा से वंचित होने का खतरा बढ़ सकता है।
इस फैसले का महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने भी विरोध किया है। मनसे विद्यार्थी सेना के रॉबर्ट डिसूजा ने कहा कि मनपा स्कूलों में छात्रों की संख्या घटने का मुख्य कारण शिक्षा की गुणवत्ता है। उनका आरोप है कि गुणवत्ता सुधारने के बजाय स्कूलों के विलय का रास्ता अपनाया जा रहा है।
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छात्रों की संख्या कम फिर भी शिक्षा से वंचित
शहर विकास अघाड़ी के नेता नगरसेवक जय ठाकुर ने भी इस निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि छात्र संख्या कम होने के बावजूद किसी भी बच्चे को शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मनपा प्रशासन से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
मनपा प्रशासन जहां इस कदम को शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उठाया गया सही निर्णय बता रहा है, वहीं विरोधी पक्ष और शिक्षा विशेषज्ञ इसे छात्रों की पहुंच और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा मान रहे हैं। ऐसे में यह फैसला आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर बड़ा विवाद बन सकता है।
