

Mira Bhaindar Municipal Corporation: मीरा भाईंदर महानगरपालिका में हाई कोर्ट के एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश की जानकारी समय पर संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंचने के मामले ने प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है।
मनपा आयुक्त राधाबिनोद शर्मा के निर्देश पर नगर रचना विभाग के शाखा अभियंता सचिन पाटिल और विधि विभाग के क्लर्क स्वप्निल गायकवाड़ को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, लेकिन कार्रवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है। जिस मामले में कथित तौर पर बड़े स्तर पर लापरवाही हुई, उसमें कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारियों पर ही क्यों?
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, बॉम्बे हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश की जानकारी मनपा के पैनल एड. मयूरेश लागू की ओर से समय पर विधि विभाग को नहीं दी गई। इसके बाद विकासक की कानूनी टीम द्वारा जमा कराई गई सूचना नगर रचना विभाग में कार्यरत सहायक विधि अधिकारी तक पहुंची।
आरोप है कि इस सूचना के बावजूद मामले की जानकारी नगर रचना विभाग के सहायक संचालक और मुख्य विधि अधिकारी तक नहीं पहुंचाई गई। मनपा प्रशासन ने विधि विभाग के क्लर्क स्वप्निल गायकवाड़ को आवक-जावक पत्रों की जिम्मेदारी का हवाला देते हुए निलंबित किया है।
लेकिन विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि क्लर्क की भूमिका पत्र दर्ज करने और संबंधित प्रक्रिया तक सीमित थी। उनका कहना है कि यदि हाई कोर्ट के आदेश से संबंधित सूचना अधिकारियों तक नहीं पहुंची, तो पैनल एडवोकेट और संबंधित विधि अधिकारी की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए थी।
केवल क्लर्क को जिम्मेदार ठहराना क्या न्यायसंगत है? यह पूरा मामला हाईकोर्ट के 27 अप्रैल के एक आदेश की है जिसमें एक डेवलपर के खिलाफ प्रतिकूल कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया गया था। लेकिन उक्त आदेश की जानकारी मीरा भाईंदर मनपा के संबंधित विभागों को नहीं मिलने से मनपा आयुक्त ने स्टॉप वर्क नोटिस जारी किया था। जिससे उन्हे हाईकोर्ट से माफी मांगनी पड़ी थी।