

पहले दिवाली विशेषांकों के 700 से 800 ग्राहक हुआ करते थे।
अब इनकी सदस्यता घटकर 150 से 200 रह गई है।
वरिष्ठ कवि प्रवीण देशमुख ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का उद्घाटन किया।
Kalyan Library Organises Marathi Diwali: मराठी भाषी समुदाय में 'दीवाली विशेषांक' (दीवाली अंक) जो खास तौर पर इस त्योहार के लिए प्रकाशित की जाती हैं, पढ़ना और उनमें मौजूद साहित्य का आनंद लेना एक पुरानी और प्रिय परंपरा रही है। लेकिन बदलते दौर में इन प्रकाशनों को पढ़ने वालों की संख्या में काफी कमी आई है।
इस परंपरा को बचाने और पाठकों की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से, कल्याण के सार्वजनिक पुस्तकालय (सार्वजनिक वाचनालय, कल्याण) ने 'दीवाली विशेषांक' साहित्यिक और सांस्कृतिक महोत्सव के लिए एक भव्य उद्घाटन समारोह आयोजित किया।
पुस्तकालय के महासचिव भिकू बारस्कर ने अपने शुरुआती संबोधन में चिंता जताई कि कभी इन दीवाली अंकों के ग्राहकों (सब्सक्राइबर्स) की संख्या 700 से 800 के बीच हुआ करती थी, जो अब घटकर केवल 150-200 रह गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये विशेषांक महाराष्ट्र राज्य की एक समृद्ध साहित्यिक परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं, एक ऐसी परंपरा जिसे बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने पाठकों से आग्रह किया कि वे इन प्रकाशनों को सब्सक्राइब करके इस विरासत को समर्थन दें। उन्होंने आगे बताया कि इस तरह की पहल इसलिए की जा रही है ताकि पाठकों में फिर से रुचि जगाई जा सके और इन दीवाली अंकों को उनका पुराना गौरव वापस दिलाया जा सके।
दिवाली त्योहार के मौके पर इस कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ कवि प्रवीण देशमुख ने धनंजय देशपांडे, ज्योति कर्वे और अमृता मोदक के साथ मिलकर दीप प्रज्वलित करके किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पाठक अपने पसंदीदा 'दीवाली विशेषांक' खरीदने के लिए एकत्रित हुए।
इस कार्यक्रम के दौरान, लाइब्रेरी के सदस्यों ने अपनी मौलिक कविताएँ प्रस्तुत कीं। रुइया कॉलेज की अनुष्का गंगाल और श्रुति कानितकर ने अपने सुरीले गायन से कार्यक्रम में संगीतमय रंग भर दिया। दिवाली के उपलक्ष्य में, सदस्यों ने एक-दूसरे को त्योहार की शुभकामनाएँ दीं, जिससे आपसी स्नेह और भाईचारे की भावना देखने को मिली।
इस कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथि शामिल हुए, जिनमें लाइब्रेरी के ट्रस्टी एडवोकेट सुरेश पटवर्धन, कार्यकारी समिति के सदस्य अरविंद शिंपी, विजय सिंह परदेशी, मुग्धा घाटे और अर्जुन डोमाडे के साथ-साथ कई पाठक और लाइब्रेरी के कर्मचारी मौजूद थे।