

ठाणे खाड़ी और उल्हास नदी पर जल परिवहन नेटवर्क विकसित करने की पहल।
कल्याण, उल्हासनगर, अंबरनाथ और बदलापुर को जोड़ने का प्रस्ताव।
यात्री परिवहन के साथ माल ढुलाई के लिए भी वॉटर लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर का सुझाव।
परियोजना से सड़क यातायात का दबाव कम होने की उम्मीद, लेकिन अभी मंजूरी और व्यवहार्यता अध्ययन बाकी हैं।
Thane Creek Connectivity: ठाणे और नवी मुंबई में ट्रैफिक की समस्या को कम करने के लिए ठाणे खाड़ी पर जल परिवहन का नेटवर्क विकसित करने की दिशा में महाराष्ट्र सागरी मंडल ने बड़ा कदम उठाया है।
मीठबंदर, मुलुंड, ऐरोली और वाशी में पैसेंजर जेट्टी बनाने के प्रस्ताव से मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में जल परिवहन का नया विकल्प मिलने की उम्मीद जगी है। इसी कड़ी में उल्हास नदी के जरिए कल्याण, अंबरनाथ और बदलापुर को जोड़ने वाली प्रस्तावित 'कल्याण-बदलापुर वॉटर मेट्रो' परियोजना भी चर्चा में है।
बदलापुर नपा के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के प्रदेश समिति सदस्य नंदकिशोर उर्फ राम पातकर इस प्रोजेक्ट के लिए लगातार फॉलोअप कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र देकर इस प्रोजेक्ट को सैद्धांतिक मंजूरी देने और इसका विस्तृत डीपीआर बनाने की मांग की है। उनके निवेदन के आधार पर एमएमआरडीए ने महाराष्ट्र सागरी मंडल को आगे की कार्रवाई के लिए पत्र भेजा है।
महाराष्ट्र सागरी मंडल के अनुसार राष्ट्रीय जलमार्ग नंबर 53 के तहत ठाणे खाड़ी और उल्हास नदी क्षेत्र में जल परिवहन विकसित किया जाना है। इसके तहत भायंदर, काल्हेर, कोलशेत, डोंबिवली के साथ-साथ मीठबंदर, मुलुंड, ऐरोली और वाशी में जेट्टी बनाने पर विचार हो रहा है।
इन जेट्टी से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और जल परिवहन सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि इसके लिए तकनीकी, पर्यावरण और वन विभाग की मंजूरी जरूरी होगी। राम पातकर ने 13 मई को मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस को निवेदन सौंपा था, पातकर के मुताबिक सिर्फ यात्री नहीं, माल ढुलाई का भी प्लान है प्रस्ताव में।
पातकर ने इस प्रोजेक्ट को सिर्फ पैसेंजर ट्रांसपोर्ट तक सीमित न रखते हुए 'वॉटर लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर' के तौर पर विकसित करने का सुझाव दिया है। इसमें उल्हासनगर की व्यापारी बाजारपेठ, अंबरनाथ एमआईडीसी, बदलापुर के औद्योगिक क्षेत्र और भिवंडी के टेक्सटाइल व लॉजिस्टिक्स हब को जलमार्ग से जोड़ने का अध्ययन करने की बात कही है।
प्रस्ताव के मुताबिक कल्याण, शहाड, उल्हासनगर, अंबरनाथ, वालिवली और बदलापुर में टर्मिनल या जेट्टी बन सकते हैं। इसमें इलेक्ट्रिक फेरीबोट, नदी का ड्रेजिंग, फ्लोटिंग जेट्टी-प्लेटफॉर्म और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं का समावेश है।
कल्याण-डोंबिवली, उल्हासनगर, अंबरनाथ, बदलापुर में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और मुंबई-नवी मुंबई जाने वाले यात्रियों की भारी संख्या को देखते हुए यह जलमार्ग सड़क ट्रैफिक का दबाव कम करने में अहम भूमिका निभा सकता है। अब एमएमआर के पत्र के बाद महाराष्ट्र सागरी मंडल व्यवहार्यता अध्ययन और डीपीआर पर क्या निर्णय लेता है, इस पर सबकी नजर है।