पहलवान जितेंद्र भगत बने महाराष्ट्र कुश्ती संघ के ठाणे जिला प्रमुख, कोल्हापुर में महागौरव अवॉर्ड से सम्मानित

Maharashtra Wrestling Association: पहलवान जितेंद्र भगत को महाराष्ट्र कुश्ती एसोसिएशन का ठाणे जिला प्रमुख नियुक्त किया गया। महाराष्ट्र कुश्ती महागौरव अवॉर्ड 2026 से उन्हें सम्मानित किया गया।
jitendra bhagat thane wrestling association chief kushti mahagaurav award
पहलवान जितेंद्र भगत का सम्मान(सोर्स: नवभारत)
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Maharashtra Wrestling Association Appointments: पहलवान जितेंद्र भगत को महाराष्ट्र रेसलिंग एसोसिएशन का ठाणे जिला प्रमुख घोषित किया गया। कोल्हापुर के श्री शाहू स्मारक भवन में हुए ‘महाराष्ट्र कुश्ती महागौरव अवॉर्ड सेरेमनी 2026’ में उन्हें खास लोगों की मौजूदगी में अपॉइंटमेंट लेटर और स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

महाराष्ट्र कुश्ती एसोसिएशन के प्रमुख पहलवान संग्राम कांबले की पहल पर आयोजित इस सेरेमनी में रेसलिंग सेक्टर के अलग-अलग लोगों को सम्मानित किया गया। इसी प्रोग्राम में ऑर्गनाइजेशन के डिस्ट्रिक्ट चीफ के चुनाव की घोषणा की गई और उन्हें अपॉइंटमेंट लेटर और स्मृतिचिन्ह दिए गए। इसमें ठाणे जिला की जिम्मेदारी कल्याण के पहलवान जितेंद्र भगत को सौंपी गई।

खेल हस्तियों और पदाधिकारियों की उपस्थिति

इस समारोह में पद्मश्री मुरलीकांत पेटकर, हिंदकेसरी दीनानाथ सिंह, ओलंपिक एथलीट बंदा पाटिल रेथरेकर, सीनियर फोटोग्राफर बापू मकानदार, महाराष्ट्र केसरी विष्णु जोशीलकर, महाराष्ट्र केसरी समाधान घोड़के, उपमहाराष्ट्र केसरी संभाजीराव पाटिल और सीनियर वस्ताद रंगनाथ कलंतराकर मौजूद थे। महाराष्ट्र कुश्ती संघ के प्रमुख संग्राम कांबले, राज्य उपाध्यक्ष अमोल मदने, मुख्य प्रवक्ता अशोक धोत्रे समेत राज्य पदाधिकारी, अलग-अलग जिलों के जिला प्रमुख, पहलवान, उस्ताद और कुश्ती के शौकीन मौजूद थे।

ठाणे में संगठन विस्तार का संकल्प

ठाणे जिले में संगठन को बढ़ाने, पहलवानों और वस्तादों को एक साथ लाने, उनके सवालों के लिए एक मंच देने और कुश्ती के विकास के लिए संगठनात्मक काम को बढ़ावा देने के लिहाज से भगत की नियुक्ति अहम होगी। उन्हें संगठन के आदर्श वाक्य, 'कुश्ती का विकास... पहलवानों का सम्मान... महाराष्ट्र का गौरव!' के साथ ठाणे जिले में काम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

महाराष्ट्र में कुश्ती की ऐतिहासिक विरासत

महाराष्ट्र राज्य में कुश्ती केवल एक खेल नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा, संस्कृति और स्वाभिमान की प्रतीक है। कोल्हापुर जैसी ऐतिहासिक भूमि को 'मल्लविद्या की जननी' माना जाता है, जहां शाहू महाराज के संरक्षण में माटी की कुश्ती को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली। लाल मिट्टी के अखाड़ों से निकलकर महाराष्ट्र केसरी और हिंदकेसरी जैसे प्रतिष्ठित खिताबों तक का सफर यहां के युवाओं के अनुशासन और कड़ी मेहनत को दर्शाता है।

कुश्ती की इस समृद्ध विरासत को जीवित रखने के लिए नए पहलवानों को सही मार्गदर्शन और आधुनिक प्रशिक्षण देना आवश्यक है। संगठन के माध्यम से माटी के इस पारंपरिक खेल को आगे बढ़ाना, वस्तादों का सम्मान करना और जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशना ही महाराष्ट्र की इस ऐतिहासिक खेल परंपरा को भविष्य में भी बनाए रखेगा।

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