

Bhiwandi Shawarma Food Poisoning: महाराष्ट्र के भीवंडी शहर में एक मशहूर शोरमा स्टॉल का जायका उस समय मातम में बदल गया, जब इसे खाने के बाद शहर में फूड पॉइजनिंग का जबरदस्त विस्फोट हुआ। महज 24 घंटों के भीतर 107 लोग बीमार पड़ गए, जिन्हें इलाज के लिए आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग बल्कि पूरे भीवंडी प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
जैसे ही मामले ने तूल पकड़ा, भीवंडी नगर निगम के मेयर नारायण चौधरी तुरंत सक्रिय हुए। उन्होंने आईजीएम अस्पताल का दौरा किया, जहां फूड पॉइजनिंग के शिकार मरीजों का इलाज चल रहा था। मरीजों की बढ़ती संख्या और उनकी हालत देखकर प्रशासन ने बिना देर किए उस फेमस शोरमा स्टॉल पर कार्रवाई का मन बनाया। प्रशासन का पीला पंजा यानी बुलडोजर उस दुकान पर चला और देखते ही देखते अवैध अतिक्रमण के साथ-साथ उस स्टॉल को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।
अस्पताल में मरीजों का हाल जानने के बाद मेयर नारायण चौधरी का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने इस घटना को व्यापार की आड़ में लोगों की जान से खिलवाड़ बताया। मेयर ने सख्त लहजे में कहा, आज हर एक आदमी बिजनेस करता है पैसा कमाने के लिए, मगर लोगों के स्वास्थ्य का ख्याल भी रखना चाहिए। उन्होंने इस घटना की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि लोगों को इस तरह जहर खिलाना बहुत ही खराब और निंदनीय कृत्य है।
कार्रवाई के साथ-साथ मेयर ने शहर के नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी। मीडिया के माध्यम से उन्होंने एक भावुक और कड़ा संदेश देते हुए कहा, मैं भिवंडी शहर वासियों को एक मैसेज देना चाहता हूं कि भाई, ये बाहर का फूड मत खाओ। मेरी आप सभी से रिक्वेस्ट है कि कम खाओ, लेकिन अच्छा खाओ। उन्होंने साफ किया कि बाहर का खाना सेहत के लिए खतरा बन सकता है, जैसा कि इस मामले में देखा गया।
यह पूरी घटना दिखाती है कि कैसे चंद रुपयों के मुनाफे के चक्कर में लोगों की जिंदगी को दांव पर लगा दिया जाता है। भीवंडी प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई ने शहर के अन्य खाद्य विक्रेताओं को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि अगर स्वच्छता और गुणवत्ता के मानकों का पालन नहीं किया गया, तो अंजाम ऐसा ही होगा। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग शोरमा स्टॉल के सैंपल्स की जांच कर रहा है ताकि संक्रमण के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।