Thane: वोटर आईडी जब्ती और पैसों के खेल के आरोप, भिवंडी में बवाल

Maharashtra Local Body Election: भिवंडी मनपा चुनाव में मतदाता नाराज नजर आ रहे हैं। विकास के वादों से मोहभंग, धनबल-दबंगई के आरोप और निर्दलीय उम्मीदवारों के उभरने से मुकाबला रोचक हो गया है।
भिवंडी महानगरपालिका (pic credit; social media)
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Bhiwandi News In Hindi: मनपा चुनाव में बाजी मारने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी हैं। मतदाता राजा चुनाव नजदीक होने पर भी किसी प्रत्याशी के प्रति अपना रुझान स्पष्ट नहीं कर रहा है।

मतदाताओं का कहना है कि, चुनाव जीत कर आज तक सभी पार्टियों ने विकास के नाम पर ठगा है, जिससे क्षेत्र मूलभूत समस्याओं से घिरा हुआ है और यह विकास से कोसों दूर है।

मुख्यमंत्री की सभा का भी कोई खास असर नहीं

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिवाजी चौक पर हुई प्रचार सभा में भाजपा-शिवसेना (शिंदे गुट) महायुति के पक्ष में विकास के मुद्दे पर वोट मांगा। इसी के साथ उन्होंने भाजपा प्रत्याशियों को जिता कर महापौर बनाए जाने की अपील की है, भिवंडी के मतदाता की मानें तो भाजपा और शिवसेना का पिछला इतिहास मतदाता भूले नहीं है। महायुति जिन लोगों के खिलाफ चुनाव लड़ रही है, उन्हीं के साथ मनपा सत्ता में भागीदारी की थी।

इस बार दबंगई, धन बल से चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे शहर में दबंगई, धनबल का असर दिखाई पड़ना शुरू है। भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा पूर्व महापौर प्रतिभा पाटिल की प्रचार अभियान रैली में की गई दबंगई पूरे शहर में चर्चा और गुस्से का विषय बन गया है।

प्रभाग में भाजपा समर्थकों की दादागिरी खतरे का संकेत है, नवभारत सूत्रों की मानें तो। शहर स्थित दर्जनों झुग्गी झोपड़ी बस्तियों के मतदाताओं की चुनाव आईडी कई दबंग उम्मीदवारों ने जमा किये हैं और उनके ऐवज में पैसा देकर उनके वोट अपने पक्ष में सुनिश्चित कर लिए हैं।

विधायक शेख के नाम पर वोट मांग रहे प्रत्याशी

  • कांग्रेस, समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी विधायक रईस शेख के नाम पर वोट मांग रहे हैं जो शहर में चर्चा और सपा, कांग्रेस के लिए सिर्फ मजाक का विषय बन गया है।
  • सपा विधायक रईस शेख द्वारा अपने बयान का वीडियो साझा किया गया है जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी को अपने से अलग करने का आग्रह किया है, ताकि उनके समर्थकों को कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देने में दिक्कत न हो।
  • महानगरपालिका की सत्ता की चाबी फिर से एक बार क्षेत्रीय आघाड़ी, निर्दलीय और कांग्रेस के पास जाएगी, यह दिखाई देने लगा है। अभी तक मतदाता का रुझान कोई एक पक्ष के साथ नहीं होने से निर्दलीय उम्मीदवारों की भाग्य खुल सकती है।
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