

Bhiwandi Building Collapse Ground Report: ठाणे जिले के भिवंडी स्थित नारपोली में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात खतरनाक इमारत के भरभराकर गिरने से 9 लोगों की मौत हो चुकी है। नारपोली के बालाजी नगर, गंगाराम वाड़ी स्थित कोहिनूर नामक इमारत रात में उस समय गिरी जब उसकी मरम्मत का काम चल रहा था। पहले इमारत की बी-विंग ढह गई। उसके कुछ समय बाद पूरी इमारत ही मिट्टी का ढ़ेर बन गई।
यह बिल्डिंग भिवंडी-निजामपुर महानगरपालिका द्वारा पहले से ही 'अति खतरनाक' घोषित की जा चुकी थी। इसके बावजूद रहिवासियों को वहां से हटाने की बजाय उसकी मरम्मत का कार्य किया जा रहा था। मनपा प्रशासन की कार्रवाई की डर से रात में उस जर्जर इमारत का काम चल रहा था। मरम्मत के नाम पर कई मजदूर भी मौत के जाल में फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रात 11 से 11.30 बजे के बीच बी-विंग का एक हिस्सा भरभराकर गिर पड़ा। इमारत की हर मंजिल पर 12-12 कमरे थे। इसमें कुल में कुल 48 कमरे थे।
बताया जा रहा है कि ग्राउंड फ्लोर पर काम चल रहा था। रात 8 से 9 बजे के बीच इमारत से "कर-कर... कट-कट" की आवाज आने लगी थी। कई परिवारों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत बाहर निकाला भी गया। लेकिन कुछ लोग सामान निकालने और कुछ मजदूर मरम्मत में ही लगे थे, तभी यह हादसा हो गया। बताया जा रहा है कि मरम्मत के दौरान कुछ पिलर तोड़े गए थे, जिससे पूरी संरचना कमजोर हो गई।
भिवंडी मनपा ने इस इमारत को 'सी-कैटेगरी' खतरनाक घोषित कर नोटिस भी दिए था। कुछ परिवारों ने इमारत खाली भी की थी, जबकि बिजली पानी न काटे जाने एवं अन्य मजबूरियों के चलते कई परिवार इमारत में अभी भी रह भी रहे थे। मलबे से एक महिला और एक लड़के को जिंदा निकाला गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। मजदूरों की पहचान भी अब तक नहीं हो पाई है।
नवभारत लाइव ने भिवंडी मनपा के आयुक्त अनमोल सागर से इस मामले को लेकर संपर्क करने की काेशिक की, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। बताया गया कि आयुक्त पिछले कई दिनों से छुट्टी पर हैं। उन्होंने अपना चार्ज भी किसी अन्य अधिकारी को नहीं दिया था।
उधर स्थानीय बीजेपी विधायक महेश चौघुले ने कहा कि इमारत काफी पुरानी और जर्जर थी। भिवंडी मनपा प्रशासन सोया हुआ था। उसने इमारत खाली नहीं कराई। लोग रात में मरम्मत करवा रहे थे जबकि निगम इसे खतरनाक घोषित कर चुका था। उन्होंने मांग की कि इस लापरवाही के जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो और पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इमारत को पहले ही धोकादायक घोषित किया गया था, तो मरम्मत की अनुमति किसने दी? रात 11 बजे तक मजदूर क्यों काम कर रहे थे? BNCMC की लापरवाही के कारण एक बार फिर गरीब परिवारों और मजदूरों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
ठाणे जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें अभी भी मलबा हटाकर फंसे लोगों की तलाश कर रही हैं। भिवंडी में यह कोई पहला हादसा नहीं है। यहां हर साल मानसून में कोई न कोई इमारत गिरती ही है। इस बार कोहिनूर अपार्टमेंट के मलबे के साथ कई घरों के सपने भी दफन हो गए। हर बार जांच कमेटी बनती है, मुआवजे का ऐलान होता है, और फिर सब भूल जाते हैं।