

बदलापुर में ₹128 करोड़ की नई पाइपलाइन फिर फूटी।
केमिकल युक्त पानी से प्रदूषण और स्वास्थ्य का खतरा।
संभाजी शिंदे ने जांच की मांग की, आंदोलन की चेतावनी दी।
Badlapur MIDC Chemical Pipeline Leakage: बदलापुर एमआईडीसी से केमिकल युक्त पानी ले जाने वाली पाइपलाइन एक बार फिर फूट गई है। इस समस्या को रोकने के लिए महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल (एमआईडीसी) ने करीब 128 करोड़ रुपये खर्च कर नई पाइपलाइन बिछाई थी।
इसके बावजूद बार-बार लीकेज होने से काम की गुणवत्ता और तकनीकी नियोजन पर सवाल उठने लगे हैं। भाजपा नगरसेवक एवं नियोजन समिति के सभापति संभाजी शिंदे ने पूरे काम की स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
बताया जा रहा है कि पाइपलाइन फूटने के बाद बड़ी मात्रा में केमिकल युक्त पानी सड़क पर फैल गया और नाले में जा मिला। पानी का बहाव तेज होने के कारण आसपास की कई इमारतों की पीने के पानी की टंकियों में भी दूषित पानी पहुंचने की आशंका जताई गई है। नाले के जरिए यह पानी उल्हास नदी तक पहुंचने की बात भी सामने आई है।
संभाजी शिंदे ने इस घटना पर नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं से नागरिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को खतरा हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि दोबारा इस तरह की घटना हुई, तो वे बड़े स्तर पर जनआंदोलन करेंगे।
एकनाथ शिंदे का आरोप है कि उन्होंने नई पाइपलाइन के लिए स्टेनलेस स्टील के पाइप इस्तेमाल करने की मांग की थी, लेकिन एमआईडीसी ने हाई-डेंसिटी पॉलीथीन (एचडीपीई) पाइप लगाए। उनके अनुसार, बार-बार होने वाले लीकेज की वजह और पाइपलाइन की तकनीकी उपयुक्तता की जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि करीब 128 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद पाइपलाइन बार-बार फूटने के मामले में इस्तेमाल की गई सामग्री, निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी योजना की विशेषज्ञों से स्वतंत्र जांच कराई जाए। जांच में लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाए।
शिंदे के मुताबिक, दूषित पानी टंकियों तक पहुंचने की आशंका के कारण नागरिकों को बार-बार टंकियां साफ करानी पड़ रही हैं। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने प्रभावित इमारतों की पानी की टंकियों से सैंपल लेकर जांच कराने तथा जरूरत के अनुसार सुरक्षित पेयजल और स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करने की मांग की है।
उन्होंने उद्योग मंत्री, पर्यावरण मंत्री, स्थानीय विधायक, जिला प्रशासन, एमआईडीसी, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल, पुलिस और नगर परिषद की संयुक्त बैठक बुलाकर ठोस कार्ययोजना तैयार करने का सुझाव दिया है।
इस योजना में लीकेज रोकने, पूरी पाइपलाइन की तकनीकी जांच कराने, नाले, नदी और सोसायटियों के पानी के सैंपल की रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा खुदाई से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने जैसे कदम शामिल करने की मांग की गई है।
शिंदे ने कहा कि केवल अस्थायी मरम्मत करके मामला बंद करने के बजाय समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए। हालांकि, पानी के नमूनों की जांच रिपोर्ट और प्रदूषण की आधिकारिक पुष्टि सामने आने के बाद ही दूषण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।